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नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में सभ्यता का समावेश

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मुहम्मदाबाद गोहना स्थित संत गणिनाथ राजकीय पीजी कॉलेज में आयोजित सेमिनार में मौजूद लोग ।संवाद - फोटो : MAU
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मुहम्मदाबाद गोहना। संसाधन प्रबंधन के माध्यम से कौशल विकास एवं उद्यमिता नई शिक्षा नीति के परिपेक्ष्य विषय पर दो दिवसीय सेमिनार का उद्घाटन मंगलवार को संत गणिनाथ राजकीय पीजी कॉलेज में हुआ। वक्ताओं ने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में सभ्यता का समावेश है। मुख्य अतिथि महाराजा सुहेलदेव राजकीय विश्वविद्यालय आजमगढ़ के वाइस चांसलर प्रोफेसर प्रदीप कुमार शर्मा ने कहा कि नई शिक्षा नीति में ज्ञान, विज्ञान, संस्कृत और भारतीय सभ्यता के प्राचीन संस्करणों का समावेश किया गया है। नई शिक्षा नीति में गुरु और शिष्य के आपसी संबंधों को प्रगाढ़ करने पर भी बल देते हुए शिक्षा और शिक्षक के कर्तव्य को मजबूत बनाने का उपाय बताया गया है। लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ध्रुवसेन सिंह ने कहा कि नई शिक्षा नीति को चार भाग में बांटा गया है। बेसिक शिक्षा, उच्च शिक्षा, के अतिरिक्त कार्यशाला और कौशल विकास पर विशेष बल दिया गया है। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति का मूल उद्देश्य संस्कार की रक्षा और बदलते जलवायु परिवर्तन से हमारे जीवन पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों से बचने का भी उपाय है। उन्होंने कहा कि छात्रों को यह बताने का प्रयास किया गया है कि जिस विषय में आपकी कुशलता है उसी कुशलता के विकास पर जोर देना चाहिए। बीएचयू की प्रोफेसर डॉक्टर इंदिरा विश्नोई ने कहा कि युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराना नई शिक्षा नीति का मूल उद्देश्य है। कैमूर बिहार से आए डॉक्टर अखिलेंद्र नाथ तिवारी ने कहा कि अवसर और रोजगार उपलब्ध होने के बाद भी कुशल लोगो के अभाव से इसका लाभ नही मिल रहा है। प्राचार्य डॉक्टर हूर तलत ने भी विचार रखे। संचालन कॉलेज की प्रोफेसर मीता सरल ने किया। आयोजक डॉ. जगदेव ने आभार जताया।
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