जीवन से जूझते मिले नौ कुपोषित बच्चे
मऊ। जिले में इस समय 27 हजार बच्चे अतिकुपोषित हैं। आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों की हड़ताल के चलते बच्चों को कुपोषण से बचाने की योजना फ्लाप हो रही है। शासन की मंशा के अनुरूप समय समय पर वजन दिवस आयोजित करके कुपोषित बच्चों का वजन लेकर उन्हें पौष्टिक आहार देने का कार्य ठप है। अधिकारियों ने जिले के सभी नौ ब्लाकों और नगर परियोजना के क्षेत्र के 98 गांवों को गोंद लिया है। लेकिन अफसरों की बेरुखी से इन गोंद लिए गांवों के अति कुपोषित बच्चों को कुपोषण से निकालने की कोई कवायद नहीं हो पा रही है।
आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों का आंदोलन पिछले 48 दिनों से अनवरत चला आ रहा है। इस अवधि में आंगनबाड़ी केंद्रों पर वितरित किया जाने वाला पौष्टिक आहार पूरी तरह ठप है। हाटकुक्ड और पंजीरी आदि की आपूर्ति ही महीनों से ठप है। हड़ताल के चलते वजन दिवस भी स्थगित करने पड़े हैं। न वजन दिवस का आयोजन हुआ और न ही अतिकुपोषित बच्चों को स्वस्थ बनाने की कोई कवायद जिला प्रशासन की ओर से की गई। वजन दिवस पर अति कुपोषित बच्चों का वजन करके यह देखा जाता है कि आयु के हिसाब से बच्चे का वजन कितना है। उम्र के अनुुसार वजन कम पाए जाने पर बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से पौष्टिक आहार दिया जाता है और उनके अभिभावकों को बच्चे की बेहतर देखभाल के साथ पौष्टिक आहार देने की सलाह दी जाती है। कुपोषण के चलते स्वास्थ्य काफी खराब हो जाने पर बच्चे को जिला अस्पताल में भर्ती करने का प्रावधान है। यह अलग बात है कि पिछले वर्ष जनपद में अतिकुपोषित बच्चों की संख्या 29 हजार थी। विभागीय आंकड़ों के अनुसार इस संख्या में महज दो हजार की कमी हुई है। वास्तविकता यह है कि कुपोषण से बचाव के लिए दी जाने वाली सभी सुविधाएं स्थगित हैं। इस बाबत जिला कार् क्रम अधिकारी जया त्रिपाठी कहती हैं कि हड़ताल के चलते स्थिति कुछ प्रभावित हुई है। इस स्थिति से शासन को अवगत कराया गया है।