मऊ। सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत मांगी गई एक जनसूचना का अधूरा जवाब देने और राज्य सूचना आयुक्त के समक्ष अपना पक्ष रखने के लिए उपस्थित न होने पर तत्कालीन जन सूचना अधिकारी/ जिला पूर्ति अधिकारी को 25 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। राज्य सूचना आयुक्त ने आयोग के रजिस्टार को जुर्माना वसूली वेतन से तीन समान किस्तों में करने का आदेश दिया है।
रतनपुरा ब्लाक क्षेत्र के साहूपुर निवासी अजय कुमार गुप्ता ने जनपद के समस्त ग्राम पंचायतों में पात्र गृहस्थी के तहत कितना खाद्यान्न का आवंटन किया गया। प्रत्येक ग्राम पंचायत में कोटेदार द्वारा कितने आवंटन का पैसा जमा किया गया है। रसीद की छाया प्रति दी जाए। सूचना मांगने वाले अजय कुमार गुप्ता का आयोग में कहना था कि उन्हें भ्रामक और अधूरी सूचनाएं उपलब्ध कराई गईं। आयोग की तरफ से निर्धारित सुनवाई तिथि 20 फरवरी 2020 में प्रतिवादी पक्ष की ओर से पूर्ति लिपिक आशीष सिंह उपस्थित हुए थे। आयोग ने तत्कालीन जिला पूर्ति अधिकारी को निर्देश दिया था कि समस्त सूचनाएं 10 दिनों के भीतर उपलब्ध कराएंगे। इसके बाद एक अप्रैल 2020 को सुनवाई तिथि हुई लेकिन लाकडाउन के चलते तिथि बढ़ाकर 27 जुलाई की गई। लेकिन वादी के आपत्ति पत्र का निस्तारण नहीं किया गया। प्रस्तुत पत्रावली पर उपलब्ध अभिलेखों के अवलोकन से आयोग ने भी यह माना कि जिला पूर्ति अधिकारी द्वारा दी गई सूचनाएं अपूर्ण एवं भ्रामक हैं। इसके बाद आयोग ने जब जिला पूर्ति अधिकारी को नोटिस भेजकर तलब किया तो वे अपना पक्ष रखने के लिए प्रस्तुत नहीं हुए। जिसपर राज्य सूचना आयुक्त ने प्रकरण में शिथिलता बरते जाने का दोषी मानते हुए जिला पूर्ति अधिकारी के विरुद्ध सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा -(8) (ख) के तहत 25 हजार रुपया का अर्थदंड लगाया है।