बारिश शुरू होते ही सर्पदंश के मामले बढ़ जाते हैं। बीते 26 दिन में सर्पदंश के जिला अस्पताल में दस मरीज आ चुके हैं, इसमें दो की मौत हो चुकी है। जबकि नगर के तीन बड़े निजी अस्पतालों में यह संख्या 15 के करीब है। इनमें तीन की माैत हो चुकी है। इसमें पचास फीसदी दूसरे जिले के मरीज हैं।
बीते एक सप्ताह में जिला अस्पताल में पहुंचे दो मरीजों के परिजनों ने प्राथमिक उपचार में देरी की, जिससे शुरुआती के महत्वपूर्ण दो घंटे निकलने से डॉक्टर इनकी जान नहीं बचा सके। उधर बीते तीन साल में अब तक 947 लोगों को जिले में सांप ने डंसा है, इसमें 17 लोगों की मौत चुकी है।
बारिश के मौसम में सांपों का निकलना शुरू हो जाता है। जागरुकता के अभाव की वजह से परिजन सर्पदंश से पीड़ित को सीधे उपचार के लिए लेकर नहीं आते बल्कि झाड़फूंक कराते हैं।
इससे उनका जीवन खतरे में पड़ जाता है। बीते चार जून को जिले के सरायलखंसी थाना क्षेत्र के पिपरीडीह फुलवरिया निवासी दीनानाथ चौहान उर्फ गुड्डू चौहान (34) को खेत में जाते समय सर्प ने डंस लिया।
शुरुआत में उसने ध्यान नहीं दिया, जब उसकी हालत गंभीर हुई तो परिजन उसे शहर के एक निजी नर्सिंग होम में भर्ती कराया। जहां देर रात इलाज के दौरान मौत हो गई।
इसी तरह से मधुबन थाना क्षेत्र के आदमपुर सुरही निवासी खुशी राजभर (14) को बीते 21 जून की रात को सोते समय सांप ने डंस लिया था। किशोरी ने उसे कीड़ा के काटने की बात सोचकर इससे परिजनों को अवगत नहीं कराया, लेकिन दो घंटे बाद इसकी तबीयत खराब होने के बाद परिजन उसे अस्पताल लेकर पहुंचे , लेकिन जब तक लेट हो जाने से डॉक्टर इसे बचा न सके।
जिला अस्पताल में सीएमएस डॉक्टर धनंजय कुमार ने बताया कि सर्पदंश के मामले लगातार आ रहे हैं। इसमें झाड़फूंक के साथ कुछ मामलों में पीड़ित की लापरवाही आ रही है। बताया कि सर्पदंश के मामले में किसी तरह की लापरवाही न बरते, इसको लेकर जिला अस्पताल में वर्तमान में 74 स्नैक एंटीवेनम उपलब्ध है।