बारिश शुरू होते ही सर्पदंश के मामले बढ़ जाते हैं। बीते तीन सप्ताह में सर्पदंश के जिला अस्पताल में दस मरीज आ चुके हैं, इसमें दो की मौत हो चुकी है। जबकि नगर के तीन बड़े निजी अस्पतालों में यह संख्या 15 के करीब है। इनमें तीन की माैत हो चुकी है। इसमें पचास फीसदी दूसरे जिले के मरीज हैं।
बीते एक सप्ताह में जिला अस्पताल में पहुंचे दो मरीजों के परिजनों ने प्राथमिक उपचार में देरी की, जिससे शुरुआती के महत्वपूर्ण दो घंटे निकलने से डॉक्टर इनकी जान नहीं बचा सके। उधर बीते तीन साल में अब तक 947 लोगों को जिले में सांप ने डंसा है, इसमें 17 लोगों की मौत चुकी है।
बारिश के मौसम में सांपों का निकलना शुरू हो जाता है। जागरुकता के अभाव की वजह से परिजन सर्पदंश से पीड़ित को सीधे उपचार के लिए लेकर नहीं आते बल्कि झाड़फूंक कराते हैं। इससे उनका जीवन खतरे में पड़ जाता है। बीते चार जून को जिले के सरायलखंसी थाना क्षेत्र के पिपरीडीह फुलवरिया निवासी दीनानाथ चौहान उर्फ गुड्डू चौहान (34) को खेत में जाते समय सर्प ने डंस लिया।
शुरुआत में उसने ध्यान नहीं दिया, जब उसकी हालत गंभीर हुई तो परिजन उसे शहर के एक निजी नर्सिंग होम में भर्ती कराया। जहां देर रात इलाज के दौरान मौत हो गई। इसी तरह से मधुबन थाना क्षेत्र के आदमपुर सुरही निवासी खुशी राजभर (14) को बीते 21 जून की रात को सोते समय सांप ने डंस लिया था। किशोरी ने उसे कीड़ा के काटने की बात सोचकर इससे परिजनों को अवगत नहीं कराया, लेकिन दो घंटे बाद इसकी तबीयत खराब होने के बाद परिजन उसे अस्पताल लेकर पहुंचे , लेकिन जब तक लेट हो जाने से डॉक्टर इसे बचा न सके।
जिला अस्पताल में सीएमएस डॉक्टर धनंजय कुमार ने बताया कि सर्पदंश के मामले लगातार आ रहे हैं। इसमें झाड़फूंक के साथ कुछ मामलों में पीड़ित की लापरवाही आ रही है। बताया कि सर्पदंश के मामले में किसी तरह की लापरवाही न बरते, इसको लेकर जिला अस्पताल में वर्तमान में 74 स्नैक एंटीवेनम उपलब्ध है।
तीन साल में 947 मामलों में 17 की हो चुकी है मौत
मऊ।सर्पदंश के ग्राफ को देखे तो 2022 से अब तक 947 मामले जिला अस्पताल और दस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंचे, इसमें 17 की मौत हो गई। इसमें 2022/23 में 383 जबकि 2023/24 में 289 तो 2024/25 में 295 मरीज पहुंचे थे।वहीं जिन्होंने सांप के काटने के बाद समय गवाए बिना अस्पताल पहुंचे उन्हें सही समय पर उपचार मिलने से जान बच गई।
ये सजगता बरतें
जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉक्टर अनिल कुमार ने बताया कि सांप डंसने के स्थान के पास हल्के से पट्टी बांधे और उस अंग को लटकाकर रखें। पीड़ित को ढांढस बधाएं कि वह सही हो जाएगा ताकि उसका ब्लड प्रेशर नहीं बढ़े। क्योंकि ब्लड प्रेशर बढ़ने से शरीर के अंदर पहुंचे सांप का जहर तेजी से फैलता है। किसी देसी दवा या झाड़फूंक के चक्कर में पड़कर समय से इलाज कराएं।
दो तिहाई मौतें हार्ट अटैक से होती हैं
मऊ। बारिश में आमदिनों की अपेक्षा सर्पदंश की घटनाएं पांच गुना बढ़ जाती हैं। सांपों के डंसने पर दो तिहाई मौतें हार्ट अटैक से होती हैं। जून का दूसरा पखवारा व जुलाई का महीना कोबरा, करैत आदि सांपों के प्रजनन का काल होता है। जब वह मादा के साथ जोड़े बनाते हैं तब आस-पास किसी का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं करते। ऐसे में वह आक्रामक हो जाते हैं। इस स्थिति में तीन माह तक विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।