टांडा तहसील अंतर्गत केदारनगर में सूखा पड़ा तालाब।
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गेहूं फसल की कटाई मड़ाई जोरों पर है। लेकिन मड़ाई के दौरान उत्पादन घटने पर किसानों का माथा ठनक जा रहा है। किसान 20 से 25 प्रतिशत नुकसान होना बता रहे हैं। कृषि विभाग के अधिकारी उत्पादन में कमी होना स्वीकार भी कर रहे हैं। प्रकृति के कहर से परेशान किसानों ने प्रशासनिक अधिकारियों को अवगत कराया। किसान क्षति आकलन की मांग कर रहे हैं।
जिले में गेहूं की खेती व्यापक पैमाने पर की जाती है। गेहूं की लहलहाती बालियों को देख उनके चेहरे पर चमक थी, लेकिन फसल पक जाने पर मड़ाई के दौरान किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें देखी जा रही हैं। कृषि विभाग के उप निदेशक डॉ. आशुतोष मिश्र की मानें तो मार्च में तापमान काफी बढ़ गया। इसके चलते दिसंबर या बाद में बुआई की हुई गेहूं की फसल के दाने हल्के हो गए हैं।
इससे उत्पादन मेें 20 प्रतिशत की कमी आई है। मौसम में आए दिन बदलाव होने के मद्देनजर क्षति का आकलन कराने की परवाह किए बिना किसान कटाई मड़ाई करने में जुट गए हैं। जिले में लगभग 13 किसानों ने किसान क्रेडिट कार्ड से लोन लिया है। वह भी मुआवजे को लेकर सशंकित हैं।
इस संबंध में बढुुआगोदाम क्षेत्र के सूर्यकांत यादव, गणेश प्रसाद, रविंद्र सिंह, जयप्रकाश सिंह का कहना है कि प्रतिवर्ष प्राकृतिक प्रकोप के चलते फसल उत्पादन प्रभावित हो जा रहा है। सूखे से खरीफ की फसल बर्बाद हुई थी, अब रबी की फसल में भी उत्पादन कम हो गया।
उप निदेशक कृषि डॉ. आशुतोष मिश्र का कहना है कि केसीसी से लोन लेने वाले तथा फसल बीमा कराने वाले किसानों के खाते में बीमा कंपनियों के माध्यम से क्षतिपूर्ति की धनराशि खाते में जाएगी। गेहूं का उत्पादन घटने पर पूछे जाने पर अपर जिलाधिकारी समीर वर्मा का कहना था कि गेहूं के नुकसान के आकलन की स्थिति अभी नहीं आई है।