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कोरोना जांच में 25 फीसदी कमी

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मऊ। स्वयं को कोविड वैक्सीन लगने के बाद आम लोगों में संक्रमण से बचाव को स्वास्थ्य कर्मी भूल गए हैं। शुरुआत में 1200 से ज्यादा लोगों के सैंपल लिए जा रहे थे, लेकिन अब यह लक्ष्य के सापेक्ष 70 से 75 फीसदी ही सैंपल तक ही सीमित रह गया हैं।
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विभाग कम संक्रमित मिलने से का दावा कर रहा है, जबकि संक्रमण का खतरा अभी भी बरकरार है। कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए वैक्सीन आने के बाद टीकाकरण शुरू हो गया है। पहले चरण में 8 हजार से ज्यादा हेल्थवर्करों को वैक्सीन लगाई जा चुकी है। इससे अधिकांश लोग जिले में कोरोना संक्रमण को कमजोर होना मान रहे हैं। ऐसे में स्वास्थ्य कर्मी बेपरवाह हो गए हैं और मास्क व सामाजिक दूरी का पालन नहीं कर रहे हैं। इससे संक्रमण का खतरा बना हुुआ है।
शुरुआत में जिले में लगभग 1500 से ज्यादा सैंपल लिए जा रहे थे। लेकिन बीते दिसंबर माह से कम संक्रमण के बाद प्रतिदिन एंटीजेन के 600 तथा आरटीपीसीआर के 650 सैंपल का लक्ष्य निर्धारित कर दिया गया है। लेकिन वर्तमान में कोरोना संक्रमण का ग्राफ बढ़ने के बाद भी लक्ष्य के सापेक्ष शत प्रतिशत सैंपल नहीं लिया जा रहा है। वर्तमान में जांच का ग्राफ 70 से 75 प्रतिशत तक सिमट कर रह गया है।
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पिछले दिनों की गई कोरोना जांच
जांच के आंकड़े विभाग की इस उदासीनता को दर्शा रहे है। गौर करे 23 मार्च को 1250 के सापेक्ष 478 आरटीपीसीआर तो 466 एंटीजेन से जांच की गई। वहीं 22 मार्च को आरटीपीसीआर 453 जबकि एंटीजेन से 433 लोगों की जांच की गई। वहीं 21 मार्च को आरटीपीसीआर से 404 जबकि एंटीजेन से 541 लोगों की जांच की गई। वहीं 20 मार्च को एंटीजेन से 665 जबकि 524 आरटीपीसीआर जांच की गई। उधर सैंपल कम होने से संक्रमित भी कम मिल रहे हैं, जबकि संक्रमण का खतरा बना हुआ है। ऐसे में आम लोगों को कोविड से बचाव के नियमों का पालन करना आवश्यक है।
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