दोहरीघाट। स्थानीय कस्बा स्थित मद्धेशिया वैश्य धर्मशाला में चल रही राम कथा के पांचवे दिन अयोध्या से पधारे अवधेश जी महाराज ने कहा कि भगवान केवल निर्गुण निराकार रहे तो कभी किसी को उनका साक्षात्कार नहीं हो सकता और अनुमान तो सर्वथा ही व्याप्त ग्रह रहित होगा।
कथाव्यास ने कहा कि विनय व्याप्त ग्रह के कोई भी हनुमान सच्चा नहीं होता। जब धुआं और आग का संबंध ज्ञान होता है तब व्याप्ति ग्रह हो जाता है और धुएं को देख कर आग का अनुमान होता है। ईश्वर का संसार के साथ क्या संबंध है यह केवल हनुमान से सिद्ध होने वाली वस्तु नहीं भगवान का प्रत्यक्षीकरण होना चाहिए। जैसा कि भक्तों ने कर दिखाया अथवा नित्य परोक्ष वस्तु का वाक्य के द्वारा ज्ञान होना चाहिए। मनुष्य को यही चाहिए कि वेद शास्त्र पुराण के वर्णन पर विश्वास करके भगवान की भक्ति करते रहे तभी भगवान प्रत्यक्ष होते हैं।
उन्होंने कहा कि गौतम ऋषि इंद्रावन पुरुष हैं। अहिल्या भी एक शक्ति है जो अदृश्य हो गई थी। अदृश्य शक्ति को केवल दृश्य बना लेने से काम नहीं चल सकता। मनुष्य का जीवन सुखी नहीं हो सकता इंद्रभान के लिए सहयोगी भी चाहिए। भगवान श्री रामचंद्र के आगमन से गौतम अहिल्या के शुद्ध- सुख में रस में आनंद में गृहस्थ जीवन का प्रारंभ हो गया। भगवान के अहिल्या तरुण एवं वहां से चलकर के जनकपुर में सीता जी का पुष्प वाटिका में मिलना आदि प्रसंगों पर विस्तार से बताया। इस अवसर पर गुलाब चंद, ध्रुव चंद, गोरखनाथ,विनय जयसवाल, राजेश जायसवाल, दीपेंद्र मद्धेशिया, बाबूलाल, श्याम जी पांडेय आदि शामिल रहे।