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समस्याओं से जूझ रहा है सीएचसी

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फतेहपुर मंडाव। मधुबन तहसील के सैकड़ों गांवों के हजारों लोगों के लिए इलाज के लिए बना फतेहपुरमंडाव सीएचसी पिछले कई सालों से खुद बीमार है। केंद्र में रोग विशेषज्ञ और संसाधनों के अभाव में आने वाले मरीजों को डॉक्टरों द्वारा जिला मुख्यालय की राह दिखाई जा रही है। यहां प्राथमिक उपचार तो हो जाता है लेकिन थोड़ा मामला गंभीर होते ही मरीजों को सदर अस्पताल रेफर किया जाता है। अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की मांग को लेकर स्थानीय लोगों द्वारा कई बार विभागीय अधिकारियों से गुुहार लगा चुके है, लेकिन कोरे आश्वासन देकर लोगों को इंतजार की बात कहकर हर बार टाल दिया जाता है।
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बताते चले कि मधुबन क्षेत्र का सबसे बड़ा अस्पताल होने के बावजूद यहां आने वाले 80 प्रतिशत लोगों को आपातकालीन सेवाओं के लिए लोगों को सीधे जिला अस्पताल भेजा जा रहा है। अस्पताल का आउटडोर देखे तो रोजाना 400 से 500 मरीज आते हैं। इनमें प्रसुताओं से लेकर सामान्य बीमारियों व दुर्घटना के मरीज रहते हैं। लेकिन अस्पताल में जनरल सर्जन, डेंटल सर्जन और बाल रोग विशेषज्ञ का अभाव 2015 से है। यहीं नहीं अस्पताल में ईसीजी, अल्ट्रासाउंड, किडनी, ब्लड शुगर , लिपिड प्रोफाइल के टेस्ट न होने के कारण पीड़ित व बीमार लोगों को बाहर जांच कराने को मजबूर है। सरकारी अस्पताल में चिकित्सीय सुविधांए बदहाल होने से मजबूरन लोगों निजी अस्पतालों में इलाज कराने को मजबूर हो रहे है। स्थानीय निवासी हमजा, न्याज अहमद, जगजीवन प्रसाद, जवाहर यादव, शमशेर आदि का कहना है कि कई बार इस संबंध में विभाग के अधिकारियों को अवगत कराने के लिए पत्र लिख चुके है। लेकिन हर बार आश्वासन तो दिया जाता है, लेकिन इसका निस्तारण नहीं किया जाता है।
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केंद्र अधीक्षक डा. राजीव कुमार पांडेय का कहना है कि चिकित्सको के रिक्त और जांच मशीन के संबंध में आला अधिकारियों को पत्र भेजा जा चुका है।
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