घाघरा में एकाएक उफान आने से कस्बा सहित तटवर्ती इलाकों के लोगों के माथे पर एक बार फिर चिंता की लकीर दिखाई दे रही है। नदी के उग्र होने के आसार से लोगों की नींद उड़ गई है। कटान होने से ऐतिहासिक धरोहरों तथा तटवर्ती इलाकों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है।
घाघरा का जलस्तर 24 घंटे में सात सेमी बढ़ने से तटवर्ती इलाकों के लोगों की धड़कने बढ़ती जा रही है। बुधवार को नदी का जलस्तर 68.70 मीटर रहा। गौरीशंकर घाट पर खतरे का निशान 69.90 मीटर है। नदी के रौद्र रुप धारण करने से नगर की ऐतिहासिक धरोहरें मुक्तिधाम, दुर्गा मंदिर, शाही मस्जिद, लोक निर्माण विभाग का डाक बंगला और मुक्तिधाम पर संकट के बादल मंडराने लगा है। वहीं तटवर्ती इलाकों धनौली रामपुर, नई बाजार, नौली, चिऊंटीडांड़, लामी, तारनपुर, कादीपुर, हरधौली, बहादुरपुर, बुढ़ावर, पतनई, सरयां, ठिकरहिया, नगरीपार, रसूलपुर, सूरजपुर सहित दर्जनों गांवों के लोग दहशत में जी रहे हैं। देवारा क्षेत्र के कटान पीड़ित मुखलाल, श्रीराम प्रसाद, सुरेंद्र यादव का कहना था कि बरसात पूर्व नदी के कहर से बचाव के लिए सिंचाई विभाग की तरफ से कार्ययोजना तो बनाई जाती है, लेकिन समस्या से निजात नहीं मिलती है। नदी में बाढ़ आने से धान की फसल, गन्ना आदि की फसल नष्ट हो जाती है, लेकिन मुआवजा के नाम पर कुछ भी नहीं मिलता है। बरसात शुरू हो गई, लेकिन बाढ़ से बचाव के लिए कोई उपाय नहीं किया जा सका है।