संसार में कुछ भी आसानी से प्राप्त नहीं मिलता। मनुष्य का शरीर भी अत्यंत दुर्लभ है। चौरासी लाख योनियों में भटकते-भटकते भगवान की करुणामय दृष्टि से ही मनुष्य शरीर मिला है। यह हमारे पुण्यों का फल नहीं है, यह तो भगवान ने हमें अवसर दिया है। यह बातें ग्रामसभा माफी लाड़नपुर स्थित चेरारामकापूरा में मंगलवार से हो रहे शतचण्डी महायज्ञ के तीसरे दिन गुरुवार की शाम गाजीपुर से पधारे कथा वाचक नीरज शास्त्री ने श्रोताओं को संबोधित करते हुए कही।
उन्होंने कहा कि मनुष्य के जीवन की पथ प्रदर्शक मां होती है। मां ही बालक बालिकाओं के जीवन की पहली गुरु होती है। इसके साथ ही शिव विवाह प्रसंग सुनाते हुए कहा की नारद मुनि महाराज की प्रेरणा से माता पार्वती ने भगवान शिव को प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की। नारदजी जीव आत्मा को परमात्मा से मिलाने का कार्य करते हैं। पार्वती जी की कठोर तपस्या की परीक्षा लेने भगवान शिव ने सप्त ऋषियों को भेजा परंतु वह भी माता पार्वती को अपने उद्देश्य से नहीं डिगा सके। भगवान श्री राम और महादेव का एक दूसरे से सेवक, स्वामी व सखा का संबंध है। भगवान शिव की बारात में उनके भक्तगण शामिल हुए।वहीं भीड़ को देख धर्म के प्रति लोगों में बढ़ती आस्था देखने को मिली।
समय समय पर श्रद्धालुओं द्वारा देवी के जयकारों के उद्घोष से वातावरण भक्तिमय हो गया। इस दौरान कार्यक्रम के आयोजक जवाहिर तिवारी, विनोद तिवारी, राजेश राय, पीयूष राय ,नरेंद्र राय ,धर्मेन्द्र तिवारी, नवीन सिंह, अमित, वीरेंद्र गुप्ता आदि रहे ।