बढ़ुआगोदाम। स्वच्छ भारत मिशन का हाल अब भी परदहा ब्लाक के गांवों में कुछ खास अच्छा नहीं है। कागजों पर तो ब्लाक के सभी 51 गांवों को 16 अक्तूबर को ही ओडीएफ घोषित कर दिया गया है। लेकिन यहां अब भी लोगों को सीवान की ओर जाते देखा जा सकता है। विभाग के आंकड़ों में तो सभी शौचायल पूर्ण हो गए हैं लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। जिनके घरों में शौचालय बने भी हैं वे भी उनका उपयोग नहीं कर रहे हैं।
जनपद के सबसे छोटे ब्लाक परदहा में बेस लाइन सर्वे 2011 के अनुसार 12 हजार 728 शौचालयों के निर्माण का लक्ष्य किया गया था। लेकिन 11 हजार 85 शौचालयों का चयन किया गया। विभाग की ओर से बनी रिपोर्ट में इन सभी शौचालयों का निर्माण पूरा कर दिया गया है। इन्हें फोटो के साथ अपलोड कर दिया गया है। डीएम की ओर 14 अगस्त 2018 को नसीरपुर, भवनाथ पुर, मानपुर, सरवां के ग्राम प्रधान और सेक्रेटरी को नोटिस जारी करके शौचालय निर्माण में तेजी लाने का निर्देश दिया था। जबकि खंडेरायपुर, सलाहाबाद और बीबीपुर गांवों के प्रधान और सेक्रेटरी को 23 अगस्त और आठ सितंबर को आदेडीह और रकौली गांवों के प्रधान और सेक्रेटरी को नोटिस जारी करके शौचालय निर्माण में आ रही सुस्ती पर फटकार लगाई जा चुकी है। विभाग ने तो शौचालय निर्माण में 100 प्रतिशत प्रगति दिखाकर वाहवाही लूट ली है लेकिन हालत यह है कि दर्जनों शौचालय अभी भी अधूरे हैं।
बहरीपुर गांव में राजेंद्र राजभर, शिटहल राजभर और चंद्रमा राजभर के शौचालय अधूरे हैं। राजेंद्र के शौचालय पर छत नहीं है जबकि शिटहल के शौचालय में न तापे सीट है और न ही दरवाजा। चंद्रमा के शौचालय का केवल ढांचा ही है। न तो पाइप है और अन्य सामान। यह तो केवल एक गांव की नजीर है। सरवां, रकौली, ओदडीह, भवनाथपुर, रणवीरपुर सहित कई गांवों में शौचालयों के निर्माण की हालत बदतर हैं।
कोट
अधूरे शौचालयों के बाबत फर्जी रिपोर्ट देने वाले सेक्रेटरी से जवाब तलब किया जाएगा। जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
राजेश तिवारी, एडीओ पंचायत