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कार्य बहिष्कार कर अस्पताल में आज तालाबंदी

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जिला महिला अस्पताल के कर्मचारियों को वेतन भुगतान के लिए सीएमओ और महिला अस्पताल के प्रभारी सीएमएस द्वारा मांगा गया एक सप्ताह का समय शनिवार को बीत गया। लेकिन कर्मचारियों को वेतन नहीं मिल सका। नाराज कर्मचारियों मंगलवार को कार्य बहिष्कार करते हुए अस्पताल पर तालाबंदी का निर्णय लिया है। कर्मचारियों ने इस आशय का पत्र भी अधिकारियों को दे दिया है। नाराज कर्मचारियों का कहना है कि अस्पताल प्रशासन उनके साथ लगातार वादाखिलाफी करता चला आ रहा है।
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डिप्लोमा फार्मासिस्ट राजपत्रित अधिकारी एसोसियेशन के मंत्री अखिलेश पांडेय ने बताया कि जिला महिला अस्पताल में प्रभारी सीएमएस डा. आरके गुप्ता को वित्तीय अधिकार न मिलने से अस्पताल में तैनात चार डॉक्टर, चार फार्मासिस्ट, एक लिपिक सहित 28 कर्मचारियों को जुलाई और अगस्त माह का वेतन नहीं मिला है। इसके लिए जिलाधिकारी, मंडलीय अपर निदेशक स्वास्थ्य और सीएमओ सहित सभी संबंधित अधिकारियों को प्रार्थनापत्र दिए गए। लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। आजिज होकर कर्मचारियों ने 7 सितंबर को महिला जिला अस्पताल में तालाबंदी कर दिया था। हड़ताल की जानकारी मिलने पर डीएम प्रकाश बिंदु ने स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव से वार्ता करने के बाद सीआरओ हंसराज यादव और सीएमओ डा. सतीशचंद्र सिंह को मौके पर भेजा। अधिकारियों ने एक सप्ताह के अंदर वेतन भुगतान सहित सारी समस्याओं के निस्तारण का आश्वासन दिया था।
लेकिन समय सीमा समाप्त होने के बाद वेतन न मिलने पर कर्मचारियों ने 14 सितंबर को डीएम को पत्रक भेजकर वेतन का भुगतान 17 सितंबर तक करने की मांग की थी। मांग पूरी न होने पर 18 सितंबर को पुन: अस्पताल में तालाबंदी करने की चेतावनी दी। अखिलेश पांडेय ने बताया कि डीएम को पत्रक सौंपने के बाद सोमवार तक वेतन भुगतान नहीं किया जा सका। इससे नाराज स्वास्थ्यकर्मी पुन: मंगलवार को सुबह 8 बजे से जिला महिला अस्पताल में तालाबंदी कर विरोध करेंगे।
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सरकारी चिकित्सक करेंगे आंदोलन
मऊ। प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ शाखा (पीएमएस) के चिकित्सक प्रोन्नति तथा वेतन भत्ते के मुद्दे पर पीएमएस के अध्यक्ष डा. एके रंजन ने लंबित मांगों को लेकर सोमवार को सीएम को संबोधित ज्ञापन सीएमओ को सौंपा। मांगे पूरी न होने पर आंदोलन करने की चेतावनी दी। मांग की है कि सातवें वेतन आयोग के तहत प्राप्त मूल वेतन का 36 प्रतिशत प्रैक्टिस बंदी भत्ता एक जनवरी 2016 से देने, सालों से बंद चिकित्सकों की प्रोन्नति, समयबद्ध वेतनमान देने की मांग की। साथ ही विशेषज्ञ चिकित्सकों को उनकी विशेषक्षा के सापेक्ष वेतन, भत्ते, पोस्टमार्टम भत्ता 100 रुपया से बढ़ाकर 200 रुपया करने, सेवानिवृत्ति 60 से बढ़ाकर 62 वर्ष करने और मारपीट की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण हेतु आवश्यक सुरक्षा के साथ डाक्टर के विरुद्घ लंबित जांच 6 माह में निस्तारित और इस समय अवधी में निस्तारित न होने पर संबंधित डाक्टर को निर्दोष साबित करने की मांग की
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