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Mau News: एक्सप्रेस-वे पर 20 रोडवेज बसों का ओवरस्पीड में चालान, एक लाख जुर्माना

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मऊ। ओवरस्पीड रोडवेज बसों हो रही दुर्घटनाओं को देखते हुए परिवहन निगम और परिवहन विभाग ने कार्रवाई तेज कर दी है। परिवहन निगम के यातायात निरीक्षकों और एआरटीओ प्राइवेट बसों के साथ रोडवेज बसों की गति पर नजर रख रहे हैं। उधर पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर लगे कैमरों से ओवरस्पीड में जनवरी से अब तक मऊ डिपो की 20 रोडवेज बसों का चालान कट चुका है।
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मऊ डिपो के बेड़े में 71 बसें हैं, इनमें से निगम की 59 और 11 अनुबंधित हैं। रोजाना 12 बसें लखनऊ जाती हैं। एक बस ग्रामीण रूट, घोसी-नदवासराय-भातकोल होते हुए आजमगढ़ से पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से और तीन बसें अयोध्या होते हुए लखनऊ जाती हैं। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) द्वारा नौ से अधिक सीटों वाले वाहनों के लिए 100 किमी प्रति घंटा रफ्तार निर्धारित है।
रफ्तार पर नजर रखने के लिए जगह जगह कैमरे लगाए गए हैं, जो अधिक रफ्तार वाले वाहनों की सूचना देकर चालान काटने में मदद करता है। बीते जनवरी माह से अब तक मऊ डिपो की 20 बसों का ओवर स्पीड में चालान कटा है। एक चालान का 500 रुपये के हिसाब से एक लाख रुपये जुर्माना लगाया गया है। नियम के अनुसार एक सप्ताह के अंदर दूसरी बार चालान होने पर जुर्माना बढ़ाकर 1000 रुपये कर दिया जाता है। मऊ डिपो की तीन बसों का एक सप्ताह के अंदर दो बार चालान कटा था। पहले चालान का जुर्माना संबंधित चालक के मानदेय से काटकर भरा जाता था, लेकिन अब परिवहन निगम ऐसा नहीं करता है।
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रोडवेज बस से कुचलकर 18 दिन में दो की जा चुकी है जान
18 दिन में रोडवेज बसों से कुचलकर दो लोगों की जान जा चुकी है। पहली घटना 20 मई की दोपहर डेढ़ बजे मधुबन थाना क्षेत्र के कोल्हुआ गांव के पास बेल्थरारोड डिपो की बस ने बाइक में टक्कर मार दी थी। जिसमें दोहरीघाट थाना क्षेत्र के जमुनीपुर निवासी अनिल राजभर (30) की मौके पर मौत हो गई थी। वहीं बीते 6 जून की दोपहर मुहम्मदाबाद गोहना कोतवाली के कैलेंडर तिराहे के पास बलिया डिपो की रोडवेज बस से कुचलकर करहां गांव निवासी शकील (47) की मौत हो गई। जबकि पत्नी रेहाना गंभीर रूप से घायल हो गई थीं। दोनों बस नंबर के आधार पर पुलिस ने चालकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।

यातायात नियम तोड़ने पर बसों का चालान कटता है। गंतव्य तक जल्दी पहुंचने के लिए चालक तेज गति से चलते हैं। कई बसों का चालान कटा है। समय समय पर वर्कशॉप में ट्रेनिंग कराकर चालकों को यातायात नियमों का पालन करने के लिए बताया जाता है। - हरिशंकर पांडेय, एआरएम, मऊ
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