20 घंटे बिजली आपूर्ति का निर्देश तो जारी कर दिया गया है, लेकिन स्थानीय तहसील मुख्यालय पर 20 घंटे बिजली की सप्लाई देना विभाग के लिए बड़ी चुनौती है। दियारा से लेकर बेलौली तक 40 किलोमीटर लंबे क्षेत्र में फैले बिजली के जर्जर तार और दशकों पूर्व लगी फीडरों पर मशीनें यही कहती हैं। जर्जर तार व बिजली विभाग में कर्मचारियों की कमी से भी इसमें तमाम अड़चनें भी आनी शुरू हो गई हैं। इसके अलावा तार, इंसुलेटर आदि भी दुरुस्त और पर्याप्त मात्रा चाहिए। इन सबसे इतर बिजली चोरी रोकना भी किसी चुनौती से कम नहीं है।
कस्बा मधुबन को वर्तमान समय में बिजली पलिया सब स्टेशन और इसके आसपास बसे सैकड़ों गांवों को सब स्टेशन कटघरा शंकर रौजा, मोलनापुर और बेलौली सब स्टेशन से बिजली मिलती है। जबकि इन सब स्टेशनों को बिजली सेमरी जमालपुर सब स्टेशन से मिलती है। सेमरी जमालपुर से रौजा तक आने वाली एचटी लाईन लगभग छह दशक पुरानी है। जिसमें गर्मी के दिनों में आये दिन बिजली रहने के समय जर्जर तारों की वजह से तार टूटकर गिरते रहते है।
संसाधनों की भी बेहद कमी है। अगर कहीं भी कोई सामान खराब होता है तो उसके लिए जिला हेडक्वार्टर गए बिना काम नहीं चलता है।
ऐसी स्थिति में 18 से 20 घंटे बिजली देने के लिए पहले जर्जर तारों, खंभों और इंसुलेटर आदि को बदलने की दरकार है। यही नहीं निर्बाध बिजली चालू रखने के लिए कर्मचारियों की भी कमी आड़े आती है। सेमरी और मधुबन के बीच लंबी दूरी होने के कारण रात में तार में फाल्ट आने पर सुबह का ही इंतजार करना पड़ता है। तीन फीडरों पर कुल छह लाइनमैन हैं इनकी संख्या कम से कम दस होनी चाहिए। इसके अलावा तीन शिफ्ट के लिए 12 एसएसओ होने चाहिए जबकि वर्तमान समय में इनकी बेहद कमी है। अवर अभियंता मुकेश कुमार का कहना है कि पेट्रोलिंग, लाइनमैन और एसएसओ की कमी है जर्जर तार भी हैं अगर इनकी कमी दूर हो जाए और समय से इंस्ट्रूमेंट मिल जाए तो शासन की मंशा के अनुरूप बिजली दी जा सकती है।