दोहरीघाट। क्षेत्र के गोठा में चल रही रामलीला सामाजिक नाटक मां का बंटवारा का मंचन के साथ रामलीला का समापन हो गया। कलाकारों ने जीवंत अभिनय कर सबको दर्द के धरातल पर आंसुओं के सागर में डूबो दिया।
नाटक में मोहनलाल की दो शादियां है। पहली पत्नी मर चुकी है तथा उससे एक बेटा गोपाल है। दूसरी पत्नी से एक बेटा विकास है। मोहनलाल चारपाई की बीमारी के कारण मौत हो जाती है। मोहन का दाह संस्कार करने के लिये बड़ा बेटा गोपाल आगे बढ़ता है तभी मामा गिरधारी लाल गोपाल को दाह संस्कार करने से रोक देता है। गोपाल की जगह विकास अपने पिता का अंतिम संस्कार करता है पर सौतेला गोपाल सबसे ज्यादा प्रेम अपनी सौतेली मां व सौतेले भाई विकास से करता है। जिससे गोपाल की पत्नी नाराज होकर मायके चली जाती है। विकास की शादी के लिए गोपाल एक साहूकार से कर्ज लेता है जैसे ही विकास की पत्नी घर में आती है तभी मामा उसका खूब कान भरता है। विकास को बताता है कि तुम्हारी मां अपने हिस्से की जमीन तुम्हारे सौतेले भाई गोपाल के नाम करना चाहती है। अंतत: विकास बंटवारा कर लेता है और गोपाल के हिस्से में मां आती है। इसी बीच विकास का एक्सीडेंट हो जाता है और उसे खून की जरूरत पड़ती है। गोपाल खून देकर विकास की जान बचाता है। विकास के माफी मांगने पर गोपाल गले लगा लेता है।