बारिश न होने से जिले में खेती किसानी पर संकट गहरा गया है। जिले में सूखे की स्थिति पैदा हो गई है। जिन किसानों ने निजी संसाधनों से किसी तरह रोपाई किया भी है तो सिंचाई के अभाव में फसल सूख रही है। हालत यह है कि अभी तक 37 प्रतिशत ही धान की रोपाई हो सकी है। कहने को तो जिले में तीन नहरें है। इन तीनों प्रमुख नहरों के 70 माइनर हैं। लेकिन इनमें पानी नहीं भरा जा सका है। ऐसे में जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग उठने लगी है।
जिले में 90292 हेक्टेयर उपजाऊ भूमि पर धान की बुआई की जानी है। बारिश न होने से किसानों को रोपाई पिछड़ने की चिंता सताने लगी है। अब तक मात्र 40 मिमी बारिश हुई है। अभी तक मात्र 22573 हेक्टेयर उपजाऊ भूमि पर धान की रोपाई हो पाई है। बारिश न होने से धान की नर्सरी खेतों में दम तोड़ रही है। खेतों में दरार पड़ गई है। कहने को तो जिले में दोहरीघाट पंप कैनाल, शारदा सहायक खंड 32 तथा खुरहट पंप कैनाल की 70 माइनरें हैं। लेकिन इनमें पानी टेल तक नहीं पहुंच रहा है। अधिकारियों की मानें तो बारिश न होने से पानी की जबरदस्त डिमांड है। ऐसे में दबंग किसान मुख्य नहर तथा प्रमुख माइनरों के कुलाबों को खुला छोड़ दे रहे हैं। कहीं-कहीं माइनरों को बांध दे रहे हैं। जिससे पानी टेल तक नहीं पहुंच पा रहा है। यही हाल राजकीय नलकूपों का है। अधिकांश राजकीय नलकूपों की नालियां क्षतिग्रस्त होने से दूर वाले खेतों में पानी ही नहीं पहुंच पा रहा है। किसान नेता देवप्रकाश राय, राकेश सिंह, जयनारायण प्रसाद, रविंद्र सिंह, सत्यनारायण शर्मा का कहना है कि सिंचाई व्यवस्था दयनीय होने के चलते धान की खेती पिछड़ रही है। शिकायत के बाद भी सिंचाई व्यवस्था को चुस्त दुरुस्त नहीं किया जा सका है। जिले को सूखाग्रस्त घोषित किया जाए।
सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता वीरेंद्र पासवान का कहना है कि दोहरीघाट पंप कैनाल पूरी क्षमता से चल रही है। पानी की डिमांड ज्यादा है। किसान मुख्य नहर तथा माइनरों के कुलाबा खुला छोड़ दे रहे हैं। इसके चलते पानी टेल तक नहीं पहुंच पा रहा है।
इनसेट
जनपद तीन बार घोषित हो चुका है सूखाग्रस्त
मऊ। जनपद अब तक तीन बार सूखाग्रस्त घोषित किया जा चुका है। पहली बार 1999 में जब वर्षा 425.80 मिमी हुई थी। दूसरी बार 2014 में जब 416.25 मिमी वर्षा हुई थी तब और 2015 में जब वर्षा 383.30 मिमी वर्षा हुई थी तब जिले को सूखाग्रस्त घोषित किया गया था।
इनसेट
21 वर्षो में जिले में हुई वर्षा का विवरण
1998 में 1200.70 मिमी
1999 में 425.80 मिमी
2000 में 640.54 मिमी
2001 में 1210.02 मिमी
2002 में 690.30 मिमी
2003 में 882.18 मिमी
2004 में 770.98 मिमी
2005 में1188.06 मिमी
2006 में 950.76 मिमी
2007 में 1622.80 मिमी
2008 में 988. 89 मिमी
2009 में 426.25 मिमी
2010 में 411.58 मिमी
2011 में 558.75 मिमी
2012 में 607. 40 मिमी
2013 में635.88 मिमी
2014 में 416.25 मिमी
2015 में 383.30 मिमी
2016 में 534.98 मिमी
2017 में 315. 75 मिमी
2018 में अब तक 40मिमी