फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

17 हजार किसान भटक रहे कर्जमाफी को

विज्ञापन
विज्ञापन
मऊ। प्रदेश सरकार की अति महत्वाकांक्षी ऋणमोचन योजना के तहत पात्र 17 हजार किसानों को भटकना पड़ रहा है। सिस्टम की गड़बड़ी के चलते इन किसानों को अभी तक योजना का लाभ नहीं मिल पाया है ।ये किसान बैंकों से लेकर ब्लाक और जिला मुख्यालय स्थित कृषि भवन का चक्कर लगाने को विवश हैं। अधिकारी खुद जिम्मेदारी ने लेकर एक दूसरे के कंधों पर जिम्मेदारियां डालकर किसानों को टरका देते हैं।
विज्ञापन

प्रदेश सरकार ने लघु एवं सीमांत किसानों के एक लाख रुपयों तक के कर्ज को माफ किया जाने का शासनादेश लागू किया है। गाइड लाइन के अनुरूप 31 मार्च 2016 तक जिन किसानों का कर्ज बैंकों में बकाया था, उन्हें ही इस योजना के लिए पात्र माना गया। योजना के तहत लेखपालों से सर्वे कराने के बाद तहसीलदारों के सत्यापन के बाद बैंकों को ऐसे कर्जदार किसानों की सूची दी गई। बैकों की ओर से प्रदेश सरकार की गाइड लाइन के अनुरूप कर्जदार किसानों का विवरण अपलोड करने में महीनों लग गए। फिर एनआईसी में इनके संपूर्ण विवरण अपलोड किए गए। जिले की चारों तहसीलों के 40396 पात्र किसान योजना के लिए चिह्नित किए गए। इन किसानों के संबंधित बैंक खातों में सीधे शासन से रकम अंतरित की गई। लेकिन अब तक केवल 23 हजार 300 किसानों को ही कर्जमाफी का लाभ दिया जा सका। अभी भी लगभग 17 हजार किसानों को फसली ऋण माफी का लाभ नहीं मिल सका है। रतनपुरा ब्लाक के दतौड़ा गांवनिवासी केदार चौहान ,खालिसपुर गांव के रविंद्र तिवारी , भेलाबांध गांव के सतीश यादव , कलाफनपुर गांव के दयाल , रसूलपुर के राम सजन सहित 17 हजार किसान इस योजना का लाभ पाने से वंचित हैं। इन किसानों का कहना है कि वे लोग अपने बैंकों से लेकर जिला कृषि अधिकारी , उप कृषि निदेशक तक गुहार लगा कर थक चुके हैं। सभी अधिकारी एक दूसरे के पास भेजते हैं। किसान नेता राकेश सिंह और देव प्रकाश राय कहते हैं कि अधिकारी किसानों की समस्याओं को लेकर गंभीर नहीं हैं। इस बाबत कृषि उप निदेशक एसपी श्रीवास्तव का कहना है कि योजना अभी बंद नहीं हुई हैं , प्रथम चरण में पात्र पाए गए किसानों को कर्जमाफी का प्रमाण पत्र वितरित कर दिया गया है। बैंक एकाउंट नंबर ,आधार नंबर अथवा अन्य किसी विवरण की गड़बड़ी के चलते जिन पात्र किसानों को अभी तक प्रमाण पत्र नहीं मिल पाया है, उन्हें इस योजना का लाभ दिया जाएगा। ऐसे किसान अपने प्रतिवेदन दे दें।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें