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जीएसटी को लेकर नहीं दूर हो रही समस्या

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मऊ। पूरे देश में जीएसटी (गुड्स सर्विस टैक्स) के लागू होने के बाद अभी भी व्यापारियों की समस्या कम नहीं हो रही है। एक जुलाई से जीएसटी लागू हुए लगभग एक माह हो गए लेकिन व्यापारियों ही नहीं बल्कि इससे संबंधित सुविधाएं प्रदान करने वाले जानकार भी इसमें आने वाली समस्याओं से इंकार नहीं कर रहे हैं। उनका भी मानना है कि जीएसटी भले ही भविष्य में देश के लिए उपयोगी हो लेकिन इसे बिना तैयारी एवं पूरी तरह से व्यवस्थित व्यवस्था के तहत नहीं किया गया है। इससे आए दिन इसे लेकर समस्या उत्पन्न हो रही है। यही नहीं दस्तावेजों में मामूली त्रुटि को लेकर भी लोग परेशान हैं। आधार कार्ड से लिंक जोड़े जाने की अनिवार्यता के चलते अगर आधार कार्ड पर अंकित जन्मतिथि, नाम में कुछ भी मामूली सी भी त्रुटि हो रही है तो लोगों को समस्याओं से दो चार होना पड़ता है। आए दिन संबंधित साईओ के जाम रहने, उनमें आने वाली खराबी आदि के चलते लोगों को काफी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। जीएसटी के साथ ही व्यापारियों के लिए इनकम टैक्स की फाईल की रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई थी। 31 जुलाई सोमवार को हालत यह थी कि व्यापारी, ठेकेदार एवं अन्य आय वाले लोग इसके लिए अपने अधिवक्ता से लेकर सीए से संपर्क करने में लगे थे। यहां पर जीएसटी एवं इंनकम टैक्स की साईट ही जाम थी। इसके चलते लोगों को काफी दिक्कत हुई और लाख प्रयास के बाद भी उनकी फाईल निश्चित समय पर नहीं दाखिल हो पाई।
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व्यापारी नेता उमाशंकर ओमर का कहना है कि सरकार ने जीएसटी आनन फानन में बिना व्यापारियों को विश्वास में लिए और बिना प्रशिक्षण के थोप दिया है। इससे व्यापारियों का काम बाधित हो रहा है। छोटे-बड़े सभी व्यापारियों में इसका भय बना हुआ है। बाईक एजेंसी संचालक शादाब कहते हैं कि जीएसटी को लेकर अभी कई बात व्यापारियों को समझ में नहीं आ रही है। इसके अलावा कई व्यवहारिक दिक्कतें भी आ रही हैं। कपड़ा व्यवसाई नौशाद का कहना है कि जीएसटी के लागू होने के बाद अभी माल मंगाने से लेकर बेचने में कई प्रकार की दिक्कतें आ रही हैं जो व्यापारियों के समझ में नहीं आ रही हैं। बताया कि पुराने स्टाक का समायोजन से लेकर आन लाईन फीडिंग आदि के लिए आए दिन
व्यापारी डॉ. रामगोपाल गुप्ता का कहना है कि कपड़े पर जीएसटी लगने से हर कोई अपने को ठगा महसूस कर रहा है। आम लोगों से जुड़े इस कारोबार में पहले से धागा पर कर पहले से पे होता आ रहा था लेकिन अब कपड़े पर अलग से जीएसटी लगने से न सिर्फ कपड़े का दाम महंगा होगा बल्कि व्यापारियों को भी कई प्रकार की समस्याओं से सामना करना पड़ेगा।
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