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कुछ ही स्कूलों में बांटा जा सका ड्रेस

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मऊ। शासन की तरफ से जिले के परिषदीय तथा सहायता प्राप्त विद्यालयों में अध्ययनरत बच्चों को समय से ड्रेस देने का दावा किया गया था, लेकिन शिक्षा सत्र के 100 दिन बीतने के बाद भी नाम मात्र स्कूलों में ही ड्रेस का वितरण हो सका है। हालत यह है कि अभी तक विद्यालय प्रबंध समिति के खाते में धन ही नहीं पहुंचा है। अधिकारी शासन से 25 प्रतिशत धन मिलने की बात बता रहे हैं।
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जिले में 1502 परिषदीय विद्यालय, 94 सहायता प्राप्त विद्यालय तथा 56 समाज कल्याण से संचालित हैं। इसके अलावा माध्यमिक विद्यालयों के 67 सहायता प्राप्त विद्यालय हैं। विद्यालयों में अध्ययनरत बच्चों को 400 रुपये की दर से नि:शुल्क दो सेट यूनिफार्म वितरित किया जाना है। नई सरकार द्वारा शिक्षा सत्र शुरू होते ही ड्रेस वितरित होने का दावा किया गया था, लेकिन शिक्षा सत्र के 100 दिन बाद भी कुछ स्कूलों में ही वितरित हो सका है। शासन की तरफ से ड्रेस के रंग में परिवर्तन किया गया है। लाल चेक की शर्ट, ब्राउन रंग की पेंट होगी। हालत यह है कि शासन की तरफ से ड्रेस वितरित करने का फरमान तो जारी कर दिया गया है, लेकिन अभी तक विद्यालय प्रबंध समिति के खाते में धन नहीं पहुंचा है। शिक्षकों की मानें तो सिलाई का रेट बढ़ जाने से ड्रेस पर लागत बढ़ जा रही है। क्वालिटी में अंतर होने पर कार्रवाई का डर सता रहा है। विशिष्ट बीटीसी वेलफेयर शिक्षक संगठन के जिलाध्यक्ष अंजनी कुमार सिंह का कहना है कि ड्रेस के लिए निर्धारित धनराशि बहुत ही कम है। इसे कम से कम एक हजार रुपया किया जाए। पिपरीडीह क्षेत्र के अभिभावक रामायन प्रसाद, वृजभान राम, मनोज यादव का कहना है कि शासन की तरफ से बच्चों के कल्याण के लिए जनकल्याणकारी योजनाएं तो शुरू की गई हैं, लेकिन समय से लाभ नहीं मिल पा रहा है। निजी विद्यालयों के बच्चे ड्रेस में जाते देख हमारे बच्चों में हीन भावना आ रही है।
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इस बारे में मंडलीय सहायक निदेशक बेसिक वाईके सिंह का कहना है कि जुलाई तक नि:शुल्क ड्रेस वितरित करा दिया जाएगा। शासन से 25 प्रतिशत ही धन मिल पाया है।
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