जिले को दो अक्तूबर को ओडीएफ घोषित नहीं किया जा सका। हालांकि बेस लाइन का नाम लेकर विभागप्रोजेक्ट को पूरा होने का दावा कर रहा है। जबकि शासन की रिपोर्ट में भी जिले के नौ में से सात ब्लाक ओडीएफ हो चुके हैं। लेकिन हकीकत इससे इतर है। विभाग की लापरवाही और सुस्ती देखकर अंतिम क्षण में प्रशासन ने पूरे जिले को ओडीएफ घोषित करने को पूरी ताकत झोंक दी थी। इसका परिणाम रहा कि तीन माह युद्ध स्तर पर काम हुआ। यदि डीएम के हस्तक्षेप से किया प्रयास पहले से विभाग ने अपनाया होता तो दो अक्तूबर को जिला ओडीएफ घोषित किया जा सकता था।
देश को स्वच्छ बनाने की मुहिम वर्ष 20415 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुरू किया। हालांकि शौचालय बनाने का काम उससे पहले से जारी था, लेकिन प्रधानमंत्री ने इसे मिशन का रुप दे दिया। इसके बाद संकल्प के तौर पर स्वच्छता और गांवों को शौचमुक्त करने की मुहिम चलाई गई। इस मिशन को पूरा करने के लिए शासन से उसी हिसाब से बजट देने का कार्य भी शुरू किया गया। नौ ब्लाकों में बंटे मऊ जिले की कुल आबादी करीब 23 लाख है।
नौ ब्लाकों को मिलाकर यहां 1462 राजस्व गांवों हैं। इन गांवों में एक लाख 71 हजार 790 शौचालय निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। विभाग की मानें तो वर्ष 2012 से 3 अक्तूबर 2018 के बीच एक लाख 19 हजार 115 शौचालयों का निर्माण हो चुका है। शेष पर काम चल रहा है। बेस लाइन के हिसाब से लक्ष्य की पूर्ति पूरी हो चुकी है। विभाग की बेस लाइन का अर्थ है कि निर्माणाधीन और जिनको धनराशि सौंपा दी गई है, उनके भी शौचालय का निर्माण होना मान लिया गया है। जिसकी निगरानी करके विभाग आने वाले समय में पूरा करा लेगा।
विभाग के आंकड़ें के हिसाब से 1462 राजस्व गांव में से अब तक 1460 गांवों में शौचालयों का निर्माण हो चुुका है। जबकि विभाग के पास इस बात का हिसाब ही नही है कि वर्ष 2012 से 2014 के बीच कितने शौचालय का निर्माण किया गया। ना ही विभाग के पास कोई आंकड़ा है, ना ही धनराशि का कोई हिसाब। वर्ष 2014 से 2018 के बीच विभाग 186 करोड़ की धनराशि खर्च करके इस लक्ष्य को पाने का दावा कर रहा है।
जिला पंचायत राज अधिकारी एसपी सिंह ने बताया कि 1 अक्तूबर को ओडीएफ गाइड लाइन के सापेक्ष 74 प्रतिशत फोटो अपलोड किया जा चुका है। इसके कारण जिले को ओडीएफ नहीं घोषित किया जा सका। इस कमी को पूरा करने के लिए शासन स्तर से 15 अक्तूबर तक अधुरे कार्य को पूरा करने का आदेश दिया गया है। ऐसे में 15 अक्तूबर तक जिले को शौच मुक्त करने की घोषणा की जाएगी।
2012 से 2014 तक बने शौचालयों को भी जोड़ा जा रहा लक्ष्य में
मऊ। ओडीएफ तिथि बढ़ने पर प्रशासन ने जहां राहत की सांस लिया, वहीं वर्ष 2012 से 2014 के बीच बनाए गए शौचलयों को चििन्हित कर इस लक्ष्य में शामिल करने की कवायद की जा रही। इसके लिए विभाग ने प्रक्रिया शुरू कर दिया है।
रिकार्ड तोड़ हुआ फोटो अपलोड का काम
मऊ। जिले को ओडीएफ कराने के लिए बीते तीन माह से जिलाधिकारी प्रकाश बिंदु ने पूरी ताकत लगा दिया था। इस क्रम में खुद डीएम हर दिन की प्रगति रिपोर्ट विभाग के लोगों से बैठक करके लेते रहें। इस दरम्यान लापवाही बरतने के मामले में कई कर्मचारियों को हटाया गया। तो स्वच्छता ग्राहियों की भर्ती भी की गई। साथ ही शौचालय निर्माण के लिए पुलिस प्रशासन का सहारा लिया गया। इस दौरान सौ से अधिक प्रधानों के साथ सेक्रेटरियों को नोटिस भी जारी की गई।
खुखंदवा गांव में खुद जिलाधिकारी ने तीन बार चौपाल लगाई। क्योंकि इस गांव को डीएम ने गोद लिया था। डीएम के कड़े तेवर का असर रहा कि सितंबर माह में 32 हजार 850 बने शौचालयों के फोटो को शासन की बेबसाइड पर अपलोड किया गया, वहीं अगस्त माह में 8 हजार 760 अपलोड हुई। इसमें सबसे फोटो अपलोड एक अक्तूबर 2018 को हुई। जहां एक दिन में रिकार्डतोड़ 5518 फोटो अपलोड हुआ।