अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर दो आदिल अफताब अहमद ने गैर इरादतन हत्या के मामले में नामजद पिता-पुत्र को दोषी पाते हुए दस- दस वर्ष की सजा के साथ ही कुल 52-52 हजार रुपया अर्थदंड निर्धारित किया। अर्थदंड न देने पर एक-एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
दोहरीघाट थाना क्षेत्र के सरयां गांव निवासी किशुन की तहरीर पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज किया था। इसमें वादी का कथन है कि 11 जुलाई 2011 को 5:30 बजे सुबह उसके भाई गौरीशंकर खेत देखने गए। वहां पर उसके चाचा श्यामदेव हरिजन पुत्र खंती तथा चंदन पुत्र श्यामदेव फावड़ा से मेड काट रहे थे। मना करने पर लाठी डंडा से मारे पीटे जिससे गौरी शंकर का दाहिना पैर टूट गया। इलाज के दौरान गौरी शंकर की मौत हो गई। पुलिस ने मामले की रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना कर आरोप पत्र कोर्ट में प्रेषित किया। अभियोजन की ओर से आठ गवाहों को पेश किया। एडीजे ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने तथा पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद श्यामदेव हरिजन और चंदन को गैर इरादतन हत्या ,मारपीट कर गंभीर चोट पहुंचाने, गाली और धमकी के मामले में दोषी पाया और उन्हें दस- दस वर्ष की सजा के साथ ही 50-50 हजार रूपया अर्थदंड की सजा सुनाया। अर्थदंड न देने पर एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। वही गाली देने के मामले में छह माह की सजा के साथ ही एक- एक हजार रूपया अर्थदंड तथा धमकी देने के मामले में एक- एक वर्ष की सजा के साथ ही एक- एक हजार रूपया अर्थदंड निर्धारित किया। अर्थदंड जमा हो जाने पर 80 प्रतिशत धनराशि गौरी शंकर के वारिसानों को देने का आदेश दिया।