मऊ। बरसात के मौसम में जल निगम और निकायों द्वारा संचालित ओवरहेड टैंकों की सफाई में खानापूर्ति हो रही है। ग्रामीण इलाकों में दशकों पूर्व बिछाई गई पाइपलाइन में आए दिन लीकेज की शिकायत एवं प्रदूषित जल की सप्लाई से लोग विभिन्न बीमारियों से ग्रसित हो रहे हैं। साफ सफाई महज कागज तक ही सिमटी है।
जिले में 13 ओवरहेड टैंक हैं। नगर क्षेत्र के पुलिस लाइन, हाइडिल कालोनी, मुंशीपुरा, मातापोखरा, पावर हाउस कालोनी सहित छह ओवरहेड टैंकों की देखरेख और सफाई नगरपालिका से होती है। वहीं चिरैयाकोट, मधुबन, दुबारी, गोठा, कसारा सहित आठ ओवरहेड टैंकों की सफाई और मरम्मत कार्य जल निगम कराता है। प्रबुद्ध वर्ग की मानें तो नगरपालिका, नगर पंचायतों तथा जलनिगम से संचालित ओवरहेड टैंकों की सफाई वर्षों से नहीं की जा रही है। नियम के तहत ओवरहेड टैंकों पर सफाई करने की तिथि लिखनी होती है, लेकिन यहां तिथि अंकित नहीं की गई है। गत वर्ष नगर के पुलिस लाइन स्थित ओवरहेड टैंक में कबूतर मरा मिला था। इसके अलावा जिला मुख्यालय पर वाटर सप्लाई का पानी-पीने से मुंशीपुरा मुहल्ले में डायरिया का प्रकोप फैला था। यहां भी ओवर हेड टैंक से ही पानी की आपूर्ति होती है। बाद में पता चला कि पाईप लाइन कहीं से लिकेज मिलना पाया गया था।
रानीपुर ब्लाक क्षेत्र के चिरैयाकोट, मधुबन कस्बा, दुबारी, गोठा, करहां, कसारा सहित विभिन्न क्षेत्रों के ओवरहेड टैंकों की स्थिति बेहद खराब है। जल निगम की तरफ से दशकों पूर्व पाइप लाइन बिछाई गई है। रख रखाव के अभाव में पाइप लाइन जगह-जगह जर्जर हालत में हैं। प्रदूषित पानी से लोग उल्टी, पेटदर्द, पेचिस सहित विभिन्न बीमारियों से ग्रसित हो रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ता छोटेलाल गांधी, व्यापारी नेता गोपाल कृष्ण बरनवाल, उमाशंकर ओमर का कहना है कि ओवरहेड टैंकों की सफाई में खानापूर्ति की जा रही है। पाइप लाइन की मरम्मत के लिए विभागीय अधिकारियों को शिकायती पत्र दिया गया बावजूद मामले को गंभीरता से नहीं लिया जा सका है।
इस संबंध में जल निगम के अधिशासी अभियंता एमए किदवई का कहना है कि ओवरहेड टैंकों की सफाई कराई गई है। सफाई तिथि अंकित करने के लिए निर्देश दिया गया है। जर्जर पाइप लाइन की मरम्मत के लिए शासन से बजट की मांग की गई है। वहीं नगरपालिका के अधिशासी अधिकारी संजय कुमार मिश्र का कहना है कि शीघ्र ही ओवरहेड टैंकों की सफाई मशीन से कराई जाएगी।