जिले में कई वर्षो से बारिश का औसत कम होने से किसानों को अपेक्षा के अनुरुप पैदावार नहीं मिली। वर्ष 2017-18 में खरीफ तथा रबी सीजन में 25041 किसानों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा का प्रीमियम जमा किया। किसानों के अनुसार बीमा कंपनियों द्वारा किसानों के बीमा क्लेम के निपटारा में खानापूर्ति की जा रही। योजना की नामित कंपनी का जिला मुख्यालय पर न तो कार्यालय है और न ही कंपनी के अधिकारी बैठते हैं। ऐसे में किसान बीमा क्लेम में आ रही समस्याओं के समाधान के लिए चक्कर काट रहे हैं।
प्राकृतिक आपदा से होने वाले फसल के नुकसान की भरपाई के लिए सरकार की तरफ से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना शुरू की गई है। जिले में 2.62 किसान पंजीकृत हैं। फसल बीमा के लिए यूनिवर्सल सोंपो जनरल इंश्योरेंस कं लि नामित की गई है। व्यापक पैमाने पर प्रचार प्रसार न होने
गत वर्ष 25041 किसानों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा लिया था। आंकड़ों पर नजर डाला जाए तो वर्ष 2017-18 में खरीफ में 12216 किसानों ने फसल बीमा लेकर 94.67 लाख प्रीमियम जमा किया था। जबकि रबी सीजन में 12875 किसानों ने 326.72 लाख प्रीमियम जमा किया था। जबकि किसानों को 3947.59 लाख का मुआवजा दिया गया है। इस वर्ष भी 13.3 प्रतिशत बारिश हुई है। कम बारिश होने के चलते मात्र 50 प्रतिशत तक ही रोपाई हो पाई है। किसानों के अनुसार केसीसी लेने पर बीमा की राशि तो कट जाती है, लेकिन प्राकृतिक आपदा होने पर क्षतिपूर्ति का आकलन नहीं किया जाता है। इस संबंध में किसान नेता देवप्रकाश राय, रविंद्र सिंह, हरिहर सिंह, श्रीकांत यादव का कहना है कि केसीसी लेने पर फसल बीमा की राशि कट तो जाती है, लेकिन प्राकृतिक आपदा में नुकसान होने पर मुआवजा नहीं मिलता है। नामित बीमा कंपनी का जिला तथा ब्लाक मुख्यालयों पर न तो कार्यालय बना है और न ही कोई अधिकारी के बैठने का समय सीमा निर्धारित किया गया है। किसानों की शिकायत के बाद भी प्रशासन की तरफ से मामले को गंभीरता से नहीं लिया जा सका है।
उप निदेशक कृषि एसपी श्रीवास्तव का कहना है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा के तहत मुआवजा आटोमैटिक सिस्टम के तहत किया जाता है। इसमें किसानों को भागदौड़ करने की जरूरत नहीं है। प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान के लिए संबंधित बैंक, बीमा कंपनी तथा प्रशासनिक अधिकारियों के यहां शिकायत दर्ज कराना होता है।