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नक्सली हमले में जिले का लाल शहीद

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चिरैयाकोट। छत्तीसगढ़ राज्य के सुकमा में मंगलवार को हुए नक्सली हमले में मारे गए जवानों में जिले का लाल धर्मेंद्र भी शामिल है। धर्मेंद्र के शहीद होने की सूचना परिवार के सदस्यों को काफी देर से मिली। इसके बाद परिवार के साथ पूरे गांव में मातमी सन्नाटा पसर गया। देखते ही देखते भारी भीड़ शहीद के घर पर जमा हो गई। शहीद धर्मेंद्र उर्फ बबलू बीते दो वर्षों से सुुकमा में तैनात था। परिवार के लोग अब सीआरपीएफ हेडक्वार्टर से लगातार संपर्क बनाए हैं, ताकि उन्हें पता चले कि शहीद का शव कब तक आएगा। शहीद की पत्नी और तीन बच्चे इस समय इलाहाबाद स्थित सीआरपीएफ सेंटर फाफामऊ में रह रहे हैं। पत्नी और बच्चों को लाने के लिए रिश्तेदार रवाना हो गए हैं।
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भेडियाधर गांव निवासी किसान खेदन यादव के तीन पुत्रों में सबसे छोटा बेटा धमेंद्र यादव उर्फ बबलू वर्ष 2004 में इलाहाबाद से सीआपीएफ में भर्ती हुआ था। इसके बाद धर्मेंद्र की तैनाती जम्मू, आसाम और गुजरात के बाद छत्तीसगढ़ में हुई। इन दिनों धर्मेंद्र की बटालियन सुकमा में तैनात थी। महज 14 साल की सेवा के बाद जवान नक्सलियों के हमले में अपने आठ साथियों के साथ शहीद हो गया। मंगलवार को सीआरपीएफ हेड क्वार्टर से तीन बजे आए फोन से धर्मेंद्र की शहादत की सूचना उसके परिवार को दी गई। फोन धर्मेंद्र के बड़े भाई महेंद्र ने रिसीव किया। फोन पर भाई की शहादत की खबर सुनते ही वह विह्वल हो उठा। यह सूचना मिलते ही जवान की मां प्रभावती, पिता खेदन और बडे़ भाई जितेंद्र और घर की महिलाओं में रोने लगीं। जवान की मां सहित सभी महिलाएं एवं अन्य परिवार के सदस्य रोने बिलखने लगे। जिसको भी धर्मेंद्र के शहीद होने की सूचना मिली उसके पांव उसके घर की तरफ चल पड़ा। जवान के घर पर सैकड़ों भीड़ एकत्र हो गई। सबकी जुुबान पर एक ही चर्चा थी कि आखिरकार सुकमा की नक्सली हिंसा सरकार कब रोक पाएगी। वहां पर कितने और जवानों को बलिदान देना होगा। सभी धर्मेंद्र की बहादुरी की चर्चा करते रहे। गांव और रिश्तेदार परिजनों को ढांढस बंधा रहे थे। धर्मेंद्र की पत्नी उमा यादव अपने तीन बच्चों के साथ फाफामऊ में है। धर्मेंद्र की तीनों बच्चे वहीं पढ़ते हैं। सबसे बड़ा बेटा विकास (11), बेटियां संध्या (8) और पूनम (5) वर्ष की है।
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