मऊ। नगर की श्रीराम लीला समिति के तत्वाधान में चल रही रामलीला के छठवें दिन रविवार को शूर्पणखा नासिका भंग, खर-दूषण वध, सीता हरण, मारिच वध और जटायु की लीला का मंचन हुआ। दंडक वन में शूर्पणखा, प्रभु श्रीराम को देखकर मोहित हो जाती है। सुंदर स्त्री का रूप धारण कर शूर्पणखा राम से जाकर कहती है कि मेरे जैसी सुंदर स्त्री और आप जैसा पुरुष पूरे ब्रह्मांड में नहीं हैं। ईश्वर ने यह जोड़ा बहुत विचार करने के बाद बनाया होगा। तीनों लोकों में मैं अब तक योग्य पुरुष की तलाश में भटक रही थी, इसलिए अब तक अविवाहित थी।
भगवान राम ने शूर्पणखा से कहा कि मैं विवाहित हूं, आप चाहें तो मेरे छोटे भाई लक्ष्मण से बात कर सकती हैं। शूर्पणखा जब लक्ष्मण के पास जाती है तो लक्ष्मण उसे काफी भला बुरा कहते हैं। वह वापस रामचंद्र के पास आती है। रामचंद्र द्वारा पुन: उसे लक्ष्मण के पास भेजने पर वह क्रोधित होकर राक्षसी रूप का धारण कर माता जानकी पर हमला करना चाहती है। रामचंद्र के इशारे पर लक्ष्मण शूर्पणखा की नाक और कान काट लेते हैं। नाक, कान कटने के बाद शूर्पणखा दंडक वन में रह रहे अपने भाईयों खर एवं दूषण के पास जाकर सारा वृत्तांत सुनाती है। खर-दूषण शूर्पणखा की कटी नाक का बदला लेने के लिए पर्णकुटी पर जाकर राम और लक्ष्मण से दंडक वन छोड़ने के लिए कहते हैं। इसके बाद राम और खर-दूषण में घनघोर युद्ध होता है, जिसमें खर और दूषण मारे जाते हैं। खर-दूषण वध होते ही दर्शकों ने श्रीराम के जयकारे लगाए। रविवार की लीला शीतला मंदिर से श्री पैलेस तक मंचित हुई।