सिविल कोर्ट सेंट्रल बार एसोसिएशन की बैठक सोमवार को संघ के पुस्तकालय भवन में हुई। इसमें बार कौंसिल ऑफ इंडिया के आह्वान कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय 23 मार्च 2018 जिसके द्वारा न्यायालय ने बार एसोसिएशन, बार कौंसिल के किसी घटना पर हड़ताल, बायकाट, अवस्टेंशन पर सीधा प्रहार करते हुए अधिवक्ताओं के मौलिक अधिकारों के हनन, राज्य सराकर से एन्स्योरेंश, मेडिक्लेम, पेंशन, स्टाईपेंड, और अन्य कल्याणकारी योजनाओं की मांग तथा हायर एजुकेशन फीस, कमीशन की ड्रॉप बिल, जिसके द्वारा सरकार अधिवक्ता संगठनों के अधिकार छीनना चाहती पर विचार किया गया। अधिवक्ताओं ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास कर बार कौंसिल आफ इंडिया के प्रस्ताव का समर्थन करने का निर्णय लिया। साथ ही विरोध स्वरुप पुरे दिन न्यायिक कार्य से विरत रहे।
बैठक के बाद अधिवक्ताओं का एक प्रतिनिधि मंडल बार के अध्यक्ष विरेंद्र बहादुर पाल के नेतृत्व में जिलाधिकारी प्रकाश बिन्दु से मिला। और उनको अपनी छह सूत्रीय मांगों के संबंध में मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन सौपा। ज्ञापन में अधिवक्ताओं ने मांग किया कि एडवोकेट्स एक्ट की धारा 34 को पूर्णत: समाप्त किया जाए, हायर एजूकेशन कमीशन बिल वापस लिया जाए, केरल के बाढ़ पीड़ित अधिवक्ताओं को 25 लाख रुपये की तत्काल मदद की जाय। बैठक में अमरनाथ सिंह, अश्वनी सिंह, अजय कुमार सिंह, सूर्यनाथ यादव, वृजभान पाल, शिवप्रसाद श्रीवास्तव, दारोगा सिंह, देवेंद्र प्रताप सिंह आदि अधिवक्ता शामिल रहे। संचालन महामंत्री संजय कुमार त्रिपाठी ने किया।