मऊ। नगर से सटकर प्रवाहित होने वाली तमसा नदी सरकारी उपेक्षा की शिकार है। इसकी सफाई अथवा इसमें गिरने वाले नालों के माध्यम से आने वाले कचरे को रोकने के लिए अब तक कोई ठोस कवायद नहीं की गई। सरकारी उपेक्षा के चलते यह नदी अब दिनों दिन गंदी और प्रदूषित होती जा रही है।कभी नगर और तटवर्ती इलाकों के लिए वरदान मानी जाने वाली यह नदी अब अभिशाप बनने की ओर तेजी से अग्रसर है।
जनपद में लगभग 57 किलोमीटर लंबाई में प्रवाहित होने वाली तमसा नदी में अकेले शहर क्षेत्र में भदेसरा से लेकर भीटी तक छह बड़े नाले गिरते हैं। इन नालों के माध्यम से कई टन कचरा रोजाना नदी में आता है। इनमें वध किए गए जानवरों के रक्त , अवशेष से लेकर भारी मात्रा में पालीथिन भी नदी में पहुंचती है। इससे भी नदी में प्रदूषण बढ़ता है। नगर पालिका की ओर से कई बार यह आश्वासन दिया गया कि नदी में गिरने वाले नालों के मुहाने पर ऐसे प्लांट लगाए जाएंगे जो गंदे पानी को नदी में जाने से पहले ही साफ कर देंगे। उनके मुहानों पर जालियां लगाने के आश्वासन भी दिए गए। लेकिन सब कुछ हवा हवाई ही साबित हुए।आज पौराणिक नदी तमसा का हाल यह है कि कई स्थानों पर यह नहाना तो दूर हाथ धोने लायक भी नहीं है।नदी के पानी को लोग पशुओं को भी पिलाने योग्य नहीं मानते।