मऊ। जिलों में कर्ज माफी योजना के तहत लघु और सीमांत किसानों की सूची बनाई गई और उनका सत्यापन भी किया गया। इसके बाद भी तमाम किसानों का ऋण माफ नहीं हुआ है। परेशान किसानों को ऋण मोचन योजना का लाभ दिलाने के लिए उनके दस्तावेेेजों का सत्यापन कराकर उन्हें शासन के बेबसाइड पर अपलोड किया गया। लेकिन अभी भी दो हजार किसानों को इस योजना का लाभ नहीं दिया जा सका है। इतना ही नहीं सत्यापन और धन मुक्त होने के बाद 266 किसानों के खाते से रुपया वापस मंगा लिया गया। शासन के आदेश पर ऋण मोचन के लिए जिले से कुल 40395 किसानों के खाते चयनित कर 138.85 करोड़ का बजट तैयार किया गया था। पहले चरण में कुल 23309 किसानों को ऋण मोचन योजना का लाभ देने की योजना थी। लेकिन किन्हीं कारणों से महज 22894 किसानों को ही योजना का लाभ दिया जा सका। इन किसानों को 117.55 लाख रुपया दिया गया। लीड बैंक के प्रबंधक गिरीशचंद्रा की मानें तो 40395 किसानों से 12585 किसानों के खाते ऐसे थे, जिन्होंने समय के अंदर ऋण का भुगतान कर दिया था। इस कारण ये पात्र होते हुए भी इन्हें योजना में शामिल नहीं किया गया। इसके अलावा 4501 किसानों को बाद में अपात्र घोषित किया गया, साथ ही 415 ऐसे किसानों के खाते थे, जिनके लिए ऋण स्वीकृत किया गया, लेकिन बैंक ने उसे रिफ्युज किया, इस तरह से यह संख्या 17501 हो गई। इस तरह से 40395 में से 17501 घटाने पर यह 22894 किसानों की संख्या आ गई। लेकिन सरकार द्वारा ऋण माफी योजना का समय सीमा बढ़ाने पर वंचित किसानों से आवेदन लेने की प्रक्रिया जारी रखी गई। इस दौरान 20 जनवरी तक दो हजार किसानों को पुन: इस योजना में शामिल किया गया। इनके नाम और खाता संख्या को शासन के किसान ऋण मोचन की बेबसाइड पर अपलोड कर दिया गया है। जैसे ही शासन से धनस्वीकृत होगा, इन्हें भी योजना का लाभ दिया जाएगा। दूसरी तरफ एनआईसी से मिले आंकड़ों पर नजर डाले तो 266 ऐसे खाते थे, जिनमें ऋण मोचन का लाभ देने के लिए धनराशि अवमुक्त कर दी गई थी। लेकिन बाद में किन्हीं कारणों से इन किसानों को इस योजना से अपात्र मानकर धनराशि को वापस ले लिया गया। वापस ली गई धनराशि 61 लाख 8 हजार 109 रुपया है।