वाराणसी से गोरखपुर वाले राष्ट्रीय राजमार्ग 29 को चौड़ी करने का प्रोजेक्ट तैयार करने के साथ उस पर काम शुरू कर दिया गया है। जिले में 46 किमी लंबी फोर लेन के लिए 108 गांवों के 13 हजार किसानों की 265.058 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहीत की गई है। लेकिन चालीस फीसदी को अभी मुआवजा मिलने का इंतजार है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री कल्पनाथ राय के प्रयास से मऊ होकर वाराणसी से गोरखपुर जाने वाली सड़क को एनएच 29 घोषित किया गया। बीते यूपीए सरकार में प्रस्तावित इस राजमार्ग पर एनडीए सरकार ने फोर लेन का काम शुरू करा दिया। जिले की सीमा में दोहरीघाट से बढ़ुआ गोदाम के बीच 46.340 किमी लंबी सड़क का निर्माण करने के लिए, घोसी से सदर तहसील के बीच 108 गांवों के 13 हजार किसानों की 265.058 हेक्टयर जमीन अधिग्रहीत की गई। विशेष भूअध्याप्ति अधिकारी कार्यालय से मिले आंकड़ों के अनुसार अभी 60 फीसदी यानी 7800 किसानों को ही उनकी जमीन का मुआवजा दिया गया है। शेष 40 फीसदी किसानों को अभी मुआवजा दिया जाना है। एसएलएओ कार्यालय के अनुसार मुआवजा देने में देरी तहसील स्तर से की जा रही है। जैसे ही तहसील से दस्तावेज कार्यालय पहुंच रहा, डीएम के स्तर से स्वीकृत सर्किल रेट के हिसाब से किसानों को उनके मुआवजे की रकम उनके खाते में स्थानांतरित की जा रही है।
13 हजार किसानों की अधिग्रहीत भूमि का मुआवजा देने के लिए एनएचआई ने 2000 करोड़ मांगा था। अब तक 1700 करोड़ रुपया अवमुक्त किया गया है। इसमें से एक हजार करोड़ रुपया मुआवजे के रूप में किसानों को बांटा गया है। विशेष भूमि अध्याप्ति कार्यालय के प्रभारी अधिकारी अपर जिलाधिकारी मनी लाल ने बताया कि कार्य में तेजी लाने का आदेश दिया गया है, ऐसे में एक माह के अंदर सभी किसानों को उनके खाते में मुआवजे की रकम भेज दी जाएगी। एडीएम ने बताया कि देर उनके स्तर से नहीं बल्कि किसानों के स्तर से की जा रही है। नोटिस जारी होने के बाद भी किसान दस्तावेज लेकर तहसील नहीं पहुंच रहे है। इसके चलते सत्यापन होकर कागजात भूध्याप्ति कार्यालय नहीं पहुंच पा रहें।
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मुआवजे की रकम में भेदभाव
अमर उजाला ब्यूरो
मऊ। सर्किल रेट भी अलग अलग होने से किसानों से विवाद हो रहा है। चूंकि जमीनों के अधिग्रहण में रेट अलग अलग रखे गए हैं। जिससे किसान खफा हैं। उनका तर्क है कि रेट को लेकर किसानों से भेदभाव किया जा रहा है। यह गलत है। जमीन के मुआवजे की रकम के लिए भूअध्याप्ति कार्यालय का चक्कर लगा रहे किसान रामप्रकाश सदर तहसील के चक फैजुल्लाहपुर गांव के निवासी है। उन्होंने बताया कि वे एक वर्ष से इस कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं। लेकिन विभाग उन्हें बार बार बुलाता है। विभाग का कल शब्द खत्म नहीं हो रहा। इनकी 54 एयर जमीन एनएचआई में अधिग्रहीत हुई है। इसीक्रम में घोसी तहसील के अमिला निवासी छोटेलाल ने बताया कि उनकी तीन एयर जमीन अधिग्रहीत हुई है। बोले दस्तावेज जमा करने के बाद भी वो मुआवजे की रकम पाने के लिए इस कार्यालय का चक्कर छह माह से लगा रहे हैं। बोले सर्किल रेट के नाम पर खूब लूटा जा रहा है। सदर तहसील के ताजोपुर गांव निवासी नीरज खरवार ने बताया कि उनकी 385 एयर जमीन ली गई है। बोले तहसील स्तर से उनके साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। पूरी जमीन चली गई, अब दाम देने में विभाग कतरा रहा। ताजोपुर गांव निवासी राहुल पांडेय की 98 एयर जमीन फोर लेन में ली गई है, राहुल की माने तो एक वर्ष से वह भाग दौड़ कर रहे हैं। बोले तीन बार पूरा दस्तावेज जमा कर चुका हूं। लेकिन कोई सुनवाई नहीं की जा रही है। राहुल ने बताया कि अधिकारी सहयोग नहीं कर रहे हैं। रिपोर्ट लगाने के नाम पर तहसील पर रुपया मांगा जा रहा ।