जिले में बड़े अपराधियों की गिरफ्तारी, मुठभेड़, बड़े खुलासों के लिए पुलिस अधिकारियों द्वारा पुरस्कारों की घोषणा की रकम मिलने में सालों लग जाते हैं। पुरस्कार पाने वाली टीम में शामिल पुलिस कर्मियों को पद नहीं, उनकी भूमिका के अनुसार ईनाम की राशि का भुगतान किया जाता है। पुरस्कार पाने वालों के लिए नगद इनाम मायने नहीं रखता बल्कि सर्विस रेकार्ड में इंट्री ही उनके लिए खास होती है। जिले में भी अब तक ऐसा ही हुआ है।
पुरस्कार की राशि के अनुरूप भूमिका निर्धारण एसपी अथवा सीओ सर्किल करते हैं। पुलिस कर्मी भी जिले में पिछले दो सालों में कुल 86 टीमों को पुरस्कार की घोषणा की गई है। इनमें से अब तक किसी भी मामले में पुलिस टीमों को पुरस्कार की राशि का भुगतान नहीं किया जा सका है। जिले में वैसे तो पिछले दो सालों से 50 हजार के एक ईनामी बदमाश को छोड़कर कोई बड़ा अपराधी नहीं पकड़ा गया है। लेकिन छोटे अपराधियों की गिरफ्तारी अथवा अपराधिक घटनाओं के खुलासों पर अब तक कुल 84 पुलिस टीमों को पुरस्कारों की घोषणा की जा चुकी है। इसमें 189 पुलिस कर्मियों को उनकी भूमिका के अनुसार पुरस्कारों की राशि दी जानी है। इनमें 50 हजार का इनामी बदमाश आजमगढ़ जिले के सूर्यांश दूबे को लगभग दस माह पूर्व मधुबन थाना क्षेत्र में एक मुठभेड़ में पकड़ा जा चुका है। हाल ही में चोरी की 11 मोटरसाइकिलें बरामद करने वाली पुलिस टीम को एसपी ने पुरस्कार देने की घोषणा किया है। वर्तमान समय में एसपी ललित कुमार सिंह ने तो अपने कार्याकाल में पुरस्कारों की झड़ी लगा दी है। इन पुरस्कारों के लिए पीएचक्यू को पत्र भेजा गया है। बजट के अभाव में पुरस्कारा की रकम का भुगतान नहीं किया जा सका है। लेकिन पुरस्कार पाने वाले पुलिस कर्मियों के सर्विस रेकार्ड में इसका अंकन किया जा चुका है।
अपर पुलिस अधीक्षक एसके श्रीवास्तव का कहना है कि पुरस्कारों के बंटवारे का निर्धारण पुलिस कर्मियों की भूमिका के अनुसार सक्षम पुलिस अधिकारी करते हैं। पुरस्कारों की राशि के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र लिख गए हैं। बजट की उपलब्धता के अनुसार पुरस्कार की राशि वितरित की जाती है।