मधुबन। जिलाधिकारी प्रकाश बिंदु की अध्यक्षता में शनिवार को फतेहपुर मंडाव ब्लॉक के गजियापुर गांव में चौपाल का आयोजन किया गया। डीएम ने ग्रामीण स्वच्छता मिशन और गांव में किए गए विकास कार्यों की विभागवार समीक्षा कर कार्यों का सत्यापन किया। इस दौरान गांव में व्याप्त गंदगी और सफाई कर्मी के न आने की शिकायत मिलने पर जिलाधिकारी ने गांव में तैनात सफाई कर्मचारी रमाशंकर को बर्खास्त करने का आदेश डीपीआरओ को दिया। नुक्कड़ नाटक के जरिए गांव के लोगों को स्वच्छता और घर में शौचालय बनवाने और उसकी उपयोगिता के बारे में बताया गया।
मधुबन तहसील क्षेत्र के फतेहपुर मंडाव विकास खंड के गजियापुर गांव में जिलाधिकारी प्रकाश बिंदु की अध्यक्षता में शनिवार को आयोजित चौपाल में जिले के सभी विभागों के अधिकारी मौजूद थे। इस गांव में 2011 की जनगणना के अनुसार 70 लोगों का नाम प्रधानमंत्री आवास के लिए चयनित किया गया था। जांच के बाद 21 लोग अपात्र पाए गए जबकि 47 लोगों का आवास निर्मित तथा दो आवास अर्धनिर्मित बताया गया। जबकि इस बार 52 लोगों का नाम शेष सूची में गया है। राशन कार्ड, सड़क निर्माण, हैंडपंप, पेंशन आदि की भी समीक्षा की गई। समीक्षा के दौरान एक व्यक्ति ने बिजली के जर्जर तार के टूटकर गिरने से आए दिन बिजली बाधित रहने की शिकायत जिलाधिकारी से की। इस दौरान डीएम विभाग के अधिकारी को कुछ कहने की बजाय वादकारी पर ही बिफर पड़े। आकाश नाम के युवक ने आवास के नाम पर बीस हजार रुपये रिश्वत लेने की बात कही तो जिलाधिकारी ने उल्टे उस युवक को थानाध्यक्ष को सौंपकर नाम पता और बयान नोट करने का आदेश किया। डीएम ने पूछा कि किसके घर शौचालय नहीं है, चौपाल में आए अधिकांश लोगों के हाथ उठ गए। शौचालय के नाम पर इतनी संख्या में हाथ उठने पर डीएम आश्चर्यचकित हो गए। इस दौरान स्वच्छता मिशन की टीम ने नाटक के माध्यम से लोगों को शौचालय बनने से होनी वाले फायदे से लोगों को अवगत कराई। इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी आशुतोष द्विवेदी, उपजिलाधिकारी निरंकार सिंह, जिला पूर्ति अधिकारी, समेत जिले और तहसील के अधिकांश अधिकारी उपस्थित थे।
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जब घर ही नहीं है शौचालय कैसे होगा
मधुबन। विकास खंड फतेहपुर मंडाव अंतर्गत गजियापुर गांव में शनिवार को जिलाधिकारी की समीक्षा के दौरान कागज में भले ही सब कुछ ठीक ठाक रहा लेकिन धरातल पर विकास कार्य में कमियों के अंबार लगा है। गांव के लोगों की मानें तो गांव में लगभग चार सौ परिवार हैं। इसमें आधी से अधिक परिवार झोपड़ी या टीनशेड डालकर गुजारा करते हैं। फूलचंद धोबी, ज्ञानचंद प्रसाद, सुरेश गुप्ता, भरत प्रसाद, रमायन मौर्य, सुनीता देवी, दुर्गावती, विधवा अकली, रीना पत्नी अच्छेलाल, प्रह्लाद खरवार, संजय खरवार आदि ये ऐसे नाम है जिनके पास आवास के नाम पर टूटी मंड़ई है या छोटा सा टीनशेड जिसमे इनका परिवार गुजारा करता है। इनमें से अधिकांश लोग मजदूरी करके ही दो जून की रोटी का जुगाड़ कर पाते हैं। घाघरा नदी के किनारे बसे इस गांव की अधिक भूमि बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में है। जिससे एक फसल तो हर साल बाढ़ में डूब जाती है। आवास के लिए सरकारी आश्वासन भी इनके लिए छलावा साबित होती है। गांव में 18 इंडिया मार्क हैंडपंप हैं, जिसमें आशीष प्रसाद, अजय कुमार, रमन लाल के दरवाजे पर लगे हैंडपंप वर्षों से खराब हैं, उन्हें बनाने की कवायद भी नहीं की गई। आधे से अधिक परिवारों के पास आज भी शौचालय नहीं है। मजबूरी में उन्हें शौच के लिए बाहर जाना ही पड़ेगा। गांव के लोगों का कहना था कि जब घर ही नहीं है तो शौचालय का क्या मतलब है।
यही हाल गांव में शौचालय का है दीपचंद मौर्य, पारस गुप्ता, फूलचंद, विजयशंकर गुप्ता आदि के दरवाजे पर सोख्ता के लिए गड्ढा खोदकर छोड़ा गया है। यही नहीं सफाई का भी गांव में बुरा हाल है। जिलाधिकारी के कार्यक्रम से पहले भरसक चमकाने के प्रयास किया गया था लेकिन गांव में बरसात के दिनों में नाली का पानी सड़कों पर बहता है। गांव में खुली नालियां विकास की अनदेखी की कहानियां बयां कर रही हैं।
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छह बच्चे पाए गए अति कुपोषित
मधुबन। जिलाधिकारी प्रकाश बिंदु की समीक्षा के दौरान गजियापुर में छह बच्चे अतिकुपोषित पाए गए, इसमें से तीन बच्चे मुनाकी पत्नी सुरेंद्र, कांति पत्नी संजय और नीलम पत्नी संजय के सत्यम, नेब्या और नीरज को जिला अस्पताल भेजा गया जबकि तीन बच्चे मुस्लिम समुदाय से थे जिन्होंने रोजे के चलते बाद में जाने को कहा।