फतहपुर मंडाव (गाजीपुर)। मधुबन तहसील क्षेत्र के कटघरा शंकर में वर्ष 2009 में क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों की पहल पर लाखों की लागत से संस्कृति विभाग द्वारा प्रेक्षागृह का शिलान्यास किया गया। लेकिन नौ सालों में भी अभी तक अधूरा है। इसमें अब आवारा पशुओं का डेरा रहता है। कुछ किसान परिसर की भूमि पर खेती कर रहे हैं। इससे क्षेत्र के संस्कृति कर्मियों में निराशा है।
संस्कृति विभाग की पहल पर क्षेत्र के कटघरा शंकर में प्रेक्षागृह निर्माण के लिए भूमि का अधिग्रहण किया गया। इस भूभाग पर प्रेक्षागृह के निर्माण के लिए वर्ष 2009 में शिलान्यास किया गया। लेकिन निर्माण का दायित्व संभालने वाली संस्था लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों की संवेदनहीनता के चलते आज तक प्रेक्षागृह पूर्ण रूप से बनकर तैयार नहीं हो पाया। इतना ही नहीं प्रेक्षागृह पर पहुंचने के लिए आज तक रास्ते का निर्माण नहीं हो सका। क्षेत्र के साहित्यकारों और लोक कलाकारों के समक्ष निराशा है। प्रेक्षागृह के पूर्ण करने के प्रति न तो अफसर और न ही जनप्रतिनिधि संवदेनशील हुए। अब तो प्रेक्षागृह का शेड भी धीरे-धीरे टूट रहा है। भवन में हमेशा अराजक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है। इससे क्षेत्र के लोक कलाकारों की उम्मीदें भी अब दम तोड़ने लगी हैं।
गायन के प्रति गहरी रुचि रखने वाले सुनील गिरि का कहना था कि जब सांस्कृतिक भवन का शिलान्यास हुआ तो लगा कि कला प्रेमियों को बहुत बडी सौगात मिलले वाली है। लेकिन जिम्मेदार लोगों की उदासीनता के चलते यह खुशी अधिक दिनो तक टिक नहीं सकी।
अजीत जायसवाल का कहना था कि वादन हमारी हाबी है लेकिन अभ्यास के लिए कोई उचित मंच नहीं मिल सका। हालांकि प्रेक्षा गृह के निर्माण को लेकर कुछ उम्मीद बंधी थी।
राजेश कुमार का कहना है कि ग्रामीणों के लिए सरकार योजनाएं तो चलाती है लेकिन यह योजना धरातल पर पहुंची या नहीं इसकी सुधि नहीं ली जाती। अमित का कहना था कि प्रेक्षागृह मात्र दिखावा साबित हो रहा है। लाखों की लागत से बने इस भवन में पशुओ व अराजक तत्वों का जमावडा लगा रहता। हम कला प्रेमियो के सामने यह प्रेक्षा गृह लालीपाप साबित हो रहा है।
इस संबंध में उपजिलाधिकारी निरंकार सिंह का कहना है कि यह प्रकरण काफी पुराना है, इसके बारे में उच्चाधिकारियों से दिशानिर्देश लिया जाएगा।