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68 ग्राम पंचायतों में मजदूरों को नहीं मिला काम

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मनरेगा से मजदूरों की जिंदगी को बेहतर बनाने का दावा किया जा रहा है लेकिन जिले के मनरेगा मजदूर काम के लिए तरस रहे हैं। वर्ष 2019-20 में जिले के 684 गांवों के सापेक्ष 68 ग्राम पंचायतों में मानव दिवस सृजित नहीं हो सका हैं। ऐसे में मजदूरों को 100 दिन का काम देने का दावा फेल साबित हो रहा है। मंडलीय समीक्षा बैठक में मंडलायुक्त ने फटकार लगाई थी। डीसी मनरेगा ने एक सप्ताह के अंदर मानव दिवस सृजित करने के लिए नोटिस जारी किया है।
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जिले में 684 गांवों में दो लाख से ज्यादा मनरेगा मजदूर पंजीकृत हैं। मनरेगा के तहत हर पंजीकृत मजदूर को काम दिया जाना है। इसके बावजूद वित्तीय वर्ष 2019-20 में 68 ग्राम पंचायतों में मानव दिवस सृजित नहीं किया जा सका है। हालांकि जिले के अधिकारी लगातार मानव दिवस को लेकर निर्देश दे रहे हैं, लेकिन योजना की रफ्तार बढ़ती नजर नहीं आ रही है। हालत यह है कि कार्ययोजना की फीडिंग तक नहीं हो सकी है। फीडिंग के बिना गांवों में काम नहीं हो सकता है। ऐसे में काम न मिलने से मजदूरों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
आंकड़ों पर नजर डाला जाए तो दोहरीघाट में दो, फतहपुर मंडाव ब्लाक में पांच, घोसी ब्लाक में छह, कोपागंज में दो, मुहम्मदाबादगोहना में 31, परदहां में पांच, रानीपुर में 12, रतनपुरा में पांच सहित 68 ग्राम पंचायतों में विकास की गति धीमी हो गई है। अधिकारियों की मानें तो चुनाव के चलते समस्या उत्पन्न हुई है। हाल ही में मंडलायुक्त ने समीक्षा बैठक में 68 ग्राम पंचायतों में मानव दिवस सृजित न होने पर विभागीय अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई थी। मंडलीय समीक्षा बैठक के बाद डीसी मनरेगा ने ब्लाकों के एपीओं को नोटिस जारी किया है।
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इस बाबत प्रभारी डीसी मनरेगा विजय शंकर राय का कहना है कि 68 ग्राम पंचायतों में मानव दिवस सृजित नहीं किए जाने के मामले में ब्लाक के एपीओ को नोटिस जारी किया गया है। एक सप्ताह का समय दिया गया है। अन्यथा संबंधित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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