क़स्बा स्थित प्राथमिक विद्यालय (डीहबाबा) परिसर में आयोजित पाँच दिवसीय मानस सम्मलेन के चौथे दिन गुरुवार की शाम को मानस मर्मज्ञ रीतेश ने कहा कि रामचरित मानस ऐसा महान ग्रंथ है, जो आमजन को जोड़ने का कार्य करता है। यह ग्रंथ कभी भी हिंदू, मुसलमान, ईसाई, सिख में भेद नहीं करता। बल्कि मानव को इंसान बनाने का काम करता है।
गुरुवार की शाम को आयोजित प्रवचन को संबोधित करते हुए रीतेश राय रामायणी ने कहा कि तुलसी दास ने श्री राम चरित मानस में राम वन गमन का अद्भुत वर्णन किया है । इसी क्रम में ग्वालियर से आई मानस विद्वान राधा शर्मा ने संगीत मय प्रवचन करते राम विवाह का रोचक वर्णन किया। मानस विद्वान उमाकांत ओझा ने मानस कथा का श्रवण कराते हुए हनुमत चरित पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हनुमान जी जो स्नेह लगाता है उसका कोई कार्य रूकता नहीं है । मानस वक्ता गंगा सागर पाण्डेय ने कहा कि आज के परिवेश में संस्कार व अनुशासन का क्षरण हुआ है । समाज व राष्ट्र के विकास में इन दोनों की महती भूमिका होती है ।ऐसे में संस्कार व अनुशासन दोनों आवश्यक है ।
कथा के अंत में श्री राम चरित मानस की आरती कर प्रसाद वितरण हुआ । राम प्रसाद कुशवाहा, अखिलेश्वर शुक्ल ,अशोक कुमार ओझा, शिवनाथ साहू, दिनेश गुप्ता, राम धनी, शिवम, विवेक,उमेश आदि उपस्थित रहे ।