मई माह बीतने में एक दिन ही शेष हैं, किसान धान की नर्सरी की तैयारी में जुट गए हैं, लेकिन नहर की सफाई का कार्य पूरा न होने से किसानों को नर्सरी पिछड़ने की चिंता सताने लगी है। नहर में पानी न आने से नहर के भरोसे रहने वाले किसान अभी तक नर्सरी के लिए खेत की तैयारी तक नहीं कर पाए हैं।जिन किसानों ने किसी तरह नर्सरी डाल भी दिया है। वह सिंचाई के अभाव में सूखने के कगार पर है। अन्य फसलों पर भी विपरीत असर पड़ रहा है। सब कुछ जानते हुए भी आला अधिकारी लापरवाह बने हैं। उधर, नाराज किसानों ने नहरों की सफाई कराने और उसमें पानी छोड़ने की मांग करते हुए चेताया है कि यदि विभाग नहीं चेता तो किसान आंदोलन को बाध्य होंगे।
जिले में 391 किमी लंबी दोहरीघाट पंप कैनाल, शारदा सहायक खंड 32 तथा खुरहट पंप कैनाल सहित तीन प्रमुख नहर सहित उससे जुड़ी 70 माइनर हैं, लेकिन नहरें किसानों के लिए अनुपयोगी साबित होती नजर आ रही है। अगेेती धान की नर्सरी डालने का समय मई के पहले सप्ताह से 15जून तक सर्वोत्तम माना जाता है। नर्सरी डालने का समय चल रहा है लेकिन सिंचाई की जरूरत के समय नहर का सफाई कार्य चलने से किसानों की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही है। नहर में पानी न आने से नहर के भरोसे खेती करने वाले अधिकांश किसान खेत की तैयारी तक नहीं कर पाए हैं। इससे किसानों को नर्सरी पिछड़ने की चिंता सताने लगी है। जिन किसानों ने निजी संसाधनों से नर्सरी डाल भी दिया है तो भीषण गर्मी के मौसम में नर्सरी को बचाए रखना मुश्किल हो रहा है। इसके साथ ही नहर में पानी न आने से जायद सहित गन्ना, सब्जी की फसल सिंचाई के अभाव में सूूख रही है।
मधुबन क्षेत्र के किसान महेंद्र मौर्य, शिवकुमार यादव, कृष्ण कुमार सिंह, कोपागंज क्षेत्र के संजय सिंह, शिवकुमार सिंह का कहना था कि धान की नर्सरी डालने के समय में सिंचाई विभाग की तरफ से नहर की सफाई कराई जाती है। इससे खेती किसानी पर विपरीत असर पड़ रहा है। किसानों की जरुरत के हिसाब से नहर में पानी छोड़ने का शेड्यूल निर्धारित किया जाए। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी नर्सरी पिछड़ती है तो इसकी जिम्मेदारी सिंचाई विभाग की होगी। इसे लेकर किसान धरना प्रदर्शन करेंगे।
कोट
नहर का सफाई कार्य दो जून तक चलेगा। तीन जून से नहर चालू कर दी जाएगी।
वीरेंद्र पासवान, अधिशासी अभियंता सिंचाई विभाग