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...लहू जहर से हो गया पानी-पानी

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पैग़म्बरे इस्लाम के दामाद और उत्तराधिकारी हजरत अली की यौमे शहादत पर शिया बाहुल्य इलाके बड़ागांव में सोमवार को जुलूस निकाला गया। इससे पूर्व उलेमा ने मजलिस को खिताब करते हुए अली की शहादत पर रोशनी डाली। वहीं नौहा और मातम से खिरोज अकीदत पेश की गई।
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शिया जामा मस्जिद, मौलाना मुज्तबा, हाजी कौसर मरहूम, जाफरी अजाखाने, अजाखाना ए जैनबिया एव अन्य स्थानो से अलम और शबीहे ताबूत का जुलूस निकाला गया। नीम तले पर इससे पहले मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना नसीमुल हसन ने कहा कि 19 वीं रमजान को जब हजरत अली सज्दे में गए तो इब्ने मुल्जिम नामक व्यक्ति ने विष भरी तलवार से उन पर वार कर दिया। जिससे उनका सिर माथे तक फट गया और उससे ख़ून क़नलने लगा। प्राण घातक विष एव घाव गम्भीर होने के कारण 21 रमजान को इमाम इस दुनिया से रुखसत हो गए। जुलूस मे अंजुमन सज्जदीया के नौहख्वानो ने नौहा पढ़ा सरे मुर्तजा और खूं की रवानी लहू जहर से हो गया पानी पानी। इस अवसर पर नजर हुसैन, लुकमान हैदर, रिजवान हैदर, नफीस असगर, गजन्फ़र अब्बास, मजहर हुसैन, अजहर हुसैन, साजिद हुसैन, शाहिद हुसैन, शमीम हैदर, तफहीम हैदर, बाक़र रजा, अली हैदर, फिरोज आबिद, अहमद समेत अन्य अजादार मौजूद थे।
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