पूरे देश में मोदी लहर के बावजूद घोसी में सांसद हरिनारायण राजभर को मिली पराजय को लेकर जनपद के बुद्धिजीवियों में शुक्रवार को चर्चा जोरों पर रही। लोगों का कहना था कि सांसद अपनी ही पार्टी के एक खेमें के लोगों की नाराजगी का शिकार हो गए। जबकि यूपी में मोदी की धमक से विरोधी दलों के तमाम दिग्गजों को हार का मुंह देखना पड़ा। ऐसे में सत्ताधारी दल के नेता अपने विरोधियों को धूल चटाने में सफल रहे तो आखिरकार घोसी में पार्टी को हार का सामना क्यों करना पड़ा।
वैसे तो भाजपा यहां पर हार के कारणों पर चिंतन मंथन करने के लिए बैठक करेगी। लेकिन सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं पर गौर करें तो सांसद की कार्यप्रणाली को लेकर जिले में भाजपा नेताओं का एक खेमा उनसेे नाराज चल रहा था। खेमे का मानना था कि सांसद पार्टी नेताओं की राय के बिना ही बड़े नेताओं अथवा सरकार पर बयान देकर किरकिरी करा रहे थे। इससे पार्टी नेता उनसे नाराज रहते थे। घोसी लोकसभा सीट पर फिर से हरिनारायाण राजभर को प्रत्याशी न बनाए जाने को लेकर जनपद के भाजपा नेता काफी आश्वस्त थे लेकिन अंतिम समय में पार्टी आलाकमान ने उन्हें प्रत्याशी बना दिया जिससे जनपद के नेता धर्मसंकट में पड़ गए।
चुनाव के दौरान हरिनारायण को सनेगपुर सहित कई गांवों के लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा था। सनेगपुर के लोगों को तो भाजपा नेताओं सहित प्रशासनिक अधिकारी भी मतदान करने पर राजी नहीं करा पाए। हालांकि चुनाव के दौरान कट्टर भाजपा समर्थकों द्वारा कहा जाने लगा कि मोदी के नाम पर पार्टी प्रत्याशी को वोट दिया जाएगा। पराजय के बाद हरिनारायण राजभर को जिला मुख्यालय पर अकेले घूमते देखा गया। एक भी पार्टी समर्थक उनके साथ नजर नही आया। हालांकि पार्टी जिलाध्यक्ष दुर्ग विजय राय ने इस धारणा को निराधार बताया। बोले पार्टी को पिछली बार की तुलना में अधिक मत मिले हैं। पार्टी के निर्देश पर हार के कारणों की समीक्षा की जाएगी।