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नहर में पानी न छोड़े जाने से खेती किसानी पर गहराया संकट

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कुसुम्हा। शारदा सहायक खंड 32 से संबद्ध माइनरों में डेढ़ साल से पानी न छोड़े जाने से किसानों की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही हैं। सिंचाई के अभाव में गेहूं की फसल सहित रवि की बोआई पिछड़ती जा रही है। किसानों ने आला अधिकारियों को नहर में पानी देने की मांग की लेकिन नहर में पानी नहीं छोड़ा जा सका है।
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शारदा सहायक खंड 32 नहर से क्षेत्र के सियरही, तारनपुर, फरसरा खुर्द, फरसरा बुजुर्ग, शाहपुर, पनइल सहित दर्जनों गांव की हजारों हेक्टेयर उपजाऊ भूमि की सिंचाई की जाती है। गेहूं बोने का समय चल रहा है, लेकिन अभी तक नहर में पानी नहीं छोड़ा जा सका है। नहर में पानी न आने से काफी किसान खेत की तैयारी तक नहीं कर पाए हैं। जिन किसानों ने किसी तरह से गेहूं की बोआई कर भी दिए हैं तो उनके सामने उसे सिंचाई की समस्या उत्पन्न हो गई है। सिंचाई के अभाव में फसल खराब हो रही है। क्षेत्र के किसान सुरेश यादव, परमहंस कुमार, राघवेंद्र चौहान, कोमल यादव, सत्येंद्र चौहान, रोहित, कमलेश का कहना है कि नहर में जरूरत के समय पानी ही नहीं छोड़ा जाता है। इसके चलते खेती किसानी भगवान भरोसे हो रही है। नहर में पानी अविलंब नहीं छोड़ा गया तो हम लोग चुप नहीं बैठेंगे। आगेती रबी की सिंचाई के पीक आवर में शारदा सहायक खंड 32 में अभी तक पानी न छोड़े जाने से किसानों को फसल के नुकसान की चिंता सताने लगी है। नहर में पानी न आने से अगेती रबी की फसल की सिंचाई न होने से फसल पर विपरीत असर पड़ रहा है। किसानों की जरूरत के समय नहर में पानी न छोडे़ जाने से खेती भगवान भरोसे हो रही है। पंपिंग सेट से 130 से 140 रुपये प्रति घंटे की दर से सिंचाई करना किसानों को भारी पड़ रहा है। बिजली भी समय से नहीं मिल रही हैं। अगर नहर में पानी अविलंब नहीं छोड़ा गया तो किसान आंदोलन करने के लिए बाध्य हो जाएंगे। इस बाबत सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता वीरेंद्र सरोज का कहना है कि यह नहर उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है। इसका संचालन गोरखपुर से होता है। उन अधिकारियों को पत्र लिखा गया है।
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