मधुबन। तहसील क्षेत्र के केशोपुर सुल्तानीपुर स्थित सार्वजनिक पोखरी पर हुए अतिक्रमण को हटाने गए तहसीलदार को भेदभाव करने को लेकर ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पड़ा। आधे घंटे तक ग्रामीण तहसीलदार की गाड़ी के आगे खड़े हो गए। अंत मे अतिक्रमण हटवाने के बाद ही तहसीलदार को ग्रामीणों ने आने दिया। वर्षो से चले आ रहे विवाद का रविवार को पटाक्षेप हो गया। इस अवसर पर विवाद को देखते हुए गांव में भारी पुलिस फोर्स मौके पर तैनात थी।
केशोपुर सुल्तानीपुर गांव सभा में एक पोखरी का विवाद था। जिस पर गांव के लगभग आधा दर्जन लोगों का कब्जा था। पोखरी से कब्जा हटवाने के लिए कोर्ट में मुकदमा चल रहा है। स्थानीय गांव निवासी अधिवक्ता सर्वेश सिंह सहित गांव के लोगों की मानें तो दर्जनों बार तहसील दिवस और समाधान दिवस में आवेदन देने के बाद भी अतिक्रमण नहीं हट नहीं पा रहा था। मजे की बात यह थी कि तहसील के कर्मचारियों द्वारा हर बार मामले को फर्जी तरीके से अतिक्रमण हटा देना दिखा दिया जाता था। थक हार कर लोग न्यायालय चले गए। कोर्ट ने पोखरी से अविलंब अतिक्रमण हटवाने का आदेश जारी किया। कोर्ट के आदेश के आधार पर रविवार को तहसीलदार हरिश्चंद्र त्रिपाठी मय फोर्स मौके पर पहुंचे, साथ ही जेसीबी लगाकर अतिक्रमण हटवा दिया। लेकिन एक व्यक्ति का अतिक्रमण हटाए बिना तहसीलदार वापस लौटने लगें। इस पर ग्रामीणों ने आपत्ति जताई, साथ ही तहसीलदार पर पक्षपात पूर्ण कार्रवाई करने का आरोप लगाते हुए उनकी गाड़ी को रोक लिया। अतिक्रमण भी जेसीबी से हटवाया गया तब जाकर ग्रामीणों ने तहसीलदार को आने दिया।
इस बाबत तहसीलदार हरिश्चंद त्रिपाठी ने बताया कि हम लोग शिकायतों के हिसाब से पोखरी को चिह्नित कर अतिक्रमण हटवाते हैं। इस मामले में लोग उच्च न्यायालय गए थे। न्यायालय के आदेश पर अतिक्रमण हटवाया गया है। विरोध के सवाल पर उन्होंने कहा कि सबका अतिक्रमण हट गया था। उसमे से एक व्यक्ति का नहीं हटा था उन्होंने स्वयं कहा कि हम हटा लेंगे तो छोड़ दिया गया,लेकिन गांव वाले उसे भी हटवाने की मांग किए तो हमने उसे भी हटवा दिया।