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मुक्तिधाम को बचाने के लिए सिंचाई विभाग ने शासन को भेजा प्रस्ताव

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मऊ। सब कुछ ठीक ठाक रहा तो दोहरीघाट कस्बा स्थित ऐतिहासिक धरोहरों को घाघरा नदी के कटान से बचाने के लिए 10.70 करोड़ की लागत से मुक्तिधाम से खाकी बाबा कुटी तक सिंचाई विभाग पीचिंग कराएगा। विभाग की तरफ से शासन को प्रस्ताव भेजा गया है।
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प्रति वर्ष घाघरा की कटान से दोहरीघाट कस्बा स्थित मुक्तिधाम का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। दिन प्रतिदिन मुक्तिधाम पर पर्यटकों का रेला लगा रहता है। काटी गई झाडिय़ां, मनमोहक पार्क, बत्तखों का तालाब में कलरव, महाकाल शिव की विशाल मूर्ति आदि पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। घाघरा की कटान से नगर की अनेक ऐतिहासिक धरोहरें नदी में समा चुकी हैं। बची खुची दुर्गा मंदिर, शाही मस्जिद, लोक निर्माण विभाग का डाक बंगला का अस्तित्व खतरें में है। इस मामले में अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत के जिला संयोजक राघवेंद्र राय शर्मा ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजा। मुख्यमंत्री कार्यालय ने आईजीआरएस पर शिकायत दर्ज करते हुए सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता से रिपोर्ट मांगा। अधीक्षण अभियंता ने अधीशासी अभियंता से प्रोजेक्ट के संबंध में आख्या मांगी। रिपोर्ट के अनुसार मुक्तिधाम तथा श्मशान घाट को बचाने के लिए 10.70 करोड़ की लागत से मुक्तिधाम से खाकी बाबा कुटी तक लगभग 1.470 किमी तक पीचिंग कराया जाएगा। पीचिंग बन जाने से नदी का रुख बदल जाएगा। इस बाबत सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता धीरेंद्र पासवान का कहना है कि मुक्तिधाम सहित ऐतिहासिक धरोहरों को कटान से बचाने के लिए 10.70 करोड़ की लागत से मुक्तिधाम से खाकी बाबा कुटी तक लगभग 1.470 किमी तक पीचिंग कराने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है।
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