मऊ। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या एक डा. अजय कुमार ने जालसाजी कर 46 लाख 25 हजार रुपये सरकारी धन का गबन करने के मामले में आरोपी ग्राम पंचायत विकास अधिकारी की जमानत अर्जी को सुनवाई के बाद खारिज कर दिया। साथ ही विवेचनाधिकारी के साथ ही सीओ की भूमिका पर सवाल उठाते हुए पुलिस अधीक्षक को दोनों के विरुद्घ कार्रवाई करने का आदेश दिया।
गबन का यह मामला समाज कल्याण अधिकारी बलदेव त्रिपाठी की तहरीर पर दर्ज हुआ था। आरोप है कि काशी गोमती संयुत क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक नदवासराय की शाखा से फर्जी हस्ताक्षर बनाकर ग्राम पंचायत मिश्रौली के खाते से 46 लाख 25 हजार गबन कर लिया गया। मामले में आरोपी ग्राम पंचायत विकास अधिकारी मालचंद उर्फ बालचंद ने कोर्ट में समर्पण किया था। अदालत ने जमानत पर सुनवाई के दौरान पाया कि पुलिस ने कम धाराओं में मामले की विवेचना कर आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल किया है। अर्जी पर बचाव पक्ष और एडीजीसी शिवदत यादव के तर्कों को सुनने तथा केस डायरी का अवलोकन करने के बाद अपराध की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने ग्राम पंचायत विकास अधिकारी की जमानत अर्जी को खारिज कर दिया। साथ ही पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखा कि मामले में विवेचक एसआई मनोज कुमार सिंह ने जानबूझ कर त्रुटिपूर्ण विवेचना करते हुए मालचंद उर्फ बालचंद को कम धाराओं में अरोपी बनाया है। जब कि आरोपी के विरुद्ध भी सह अभियुक्तों की तरहभारतीय दंड विधान की धारा 467, 468, 409 का अपराध बनता है। मामले में विवेचक ने बिना प्रपत्रों का अवलोकन किए कम धाराओं में मालचंद उर्फ बालचंद के विरुद्ध आरोप पत्र प्रेषित किया है। अदालत ने एसपी को आदेश की प्रति इस निर्देश के साथ भेजने का आदेश दिया कि आदेश में की गई टिप्पणी को देखते हुए विवेचक दरोगा और सीओ के विरुद्ध कार्यवाही करें। बताते चले इस मामले में आरोपी प्रधान कल्पनाथ जमानत पर है जबकि प्रबंधक जेल में निरुद्ध है।