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डेढ़ माह में बेअसर हुआ पॉलिथीन प्रतिबंध का फरमान

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प्रदेश सरकार के पॉलिथीन बिक्री रोकने के फरमान का असर जिले में बेअसर है। यहां धड़ल्ले से शहर से लेकर गांव तक रोजाना लाखों रुपये की पॉलिथीन बिक रही है। इससे पर्यावरण दूषित होने के साथ लोगों को मुफ्त में गंभीर बीमारियां मिल रही हैं। सब कुछ जानते हुए सरकारी मशीनरी चुप्पी साधे हैं तो लोग भी जागरूक नहीं हो रहे हैं।
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बताते चले कि प्रदेश में 15 अगस्त 2018 से 50 माइक्रेन की पॉलिथीन पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है। प्रतिबंध लगने के एक माह तक जिले में प्रशासन और नगर निकायों द्वारा लगातार अभियान चलाया था। इसके बाद जिलों के प्रशासन की सक्रियता बढ़ी। पॉलिथीन निर्माण, बिक्री पर पाबंदी लग गई। इसका असर तत्कालीन समय करीब एक माह तक दिखाई पड़ा। इसके बाद धीरे-धीरे इसकी खिलाफत में चलने वाले अभियान फुस्स हो गए। इस पर बेफिक्र सब्जी, फल और चायवालों ने फिर से इस्तेमाल शुरू कर दिया। इस समय में पुन: बाजार में रेडीमेड, परचून से लेकर बाकी दुकानों पर भी पॉलिथीन की मांग बढ़ गई है। बाजार सूत्रों की माने तो मऊ में रोजाना 20 से 25 प्रतिकिलो पॉलिथीन में सामान ग्राहकों को दिया जा रहा है। वहीं, घोसी, मझवारा, इंदारा, कोपागंज, रतनपुरा, मुहम्मदाबाद गोहना, वलीदपुर, अमिला कस्बों में यह मात्रा दोगुनी है। इस संबंध में नगर पालिका मऊ ईओ संजय कुमार मिश्रा का कहना है कि पॉलिथीन बिक्री और इस्तेमाल पर पाबंदी लगाई है। एक बार फिर से अभियान चलाने की तैयारी की गई है। सख्ती और चेतावनी के बाद भी बात न मानने वालों पर कड़ी कार्रवाई होगी।

एक माह में फुर्र हुआ आदेश
मऊ। 15 अगस्त को पॉलिथीन पर प्रतिबंध लगने के बाद नगरपालिका मऊ और स्थानीय प्रशासन द्वारा कार्रवाई कर एक माह में 25 किलो से ज्यादा पॉलिथीन जब्त के साथ 10 दुकानदारों पर जुुर्माना लगाया था। वहीं, घोसी तहसील में 50 किलो, मधुबन तहसील में 50 किलो और मुहम्मदाबाद में 50 किलो से ज्यादा पॉलिथीन जब्त की गई थी लेकिन पिछले डेढ़ माह से कोई अभियान नहीं चलने से बाजारों में डंप पॉलिथीन को दुकानदारों खपाया जा रहा है।
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