मऊ। नगर के जिला अस्पताल में आग बुझाने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है, गर्मी के मौसम में दुर्घटना की संभावना के बाद भी विभागीय अधिकारी गंभीर नहीं हैं। जबकि दूसरी तरफ अस्पताल में व्याप्त इस अव्यवस्था को फोकस करते हुए अग्निशमन विभाग ने अस्पताल प्रशासन को आगाह करने के लिए पत्र जारी किया है। इसमें अस्पताल में पर्याप्त संख्या में अग्निशमन यंत्र लगाने को कहा गया है। इसके बाद भी सदर अस्पताल में अग्निशमन यंत्र लगाने का प्रयास नहीं किया जा रहा है। ऐसे में सदर अस्पताल में आगजनी की घटना पर बड़े हादसे से इंकार नहीं किया जा सकता है।
जिला अस्पताल में यदि आग लगी तो उसे बुझाने के लिए अग्निशमन यंत्र ही नहीं है। इतने बड़े अस्पताल में एक भी अग्निशमन यंत्र लगा न होना अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही बताने के लिए काफी है। जबकि आग से बचाव के लिए हर 15 मीटर पर एक अग्निशमन यंत्र लगा होना अनिवार्य है। बता दें तीन साल पहले कानपुर के जिला अस्पताल में शॉर्ट सर्किट से आग लगने की घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग द्वारा सभी सरकारी अस्पतालों में आग से बचाव के लिए पर्याप्त व्यवस्था करने का भी निर्देश दिया था। वहीं इस संबंध में अग्निशमन विभाग भी अस्पताल प्रबंधन को कई बार पत्र लिखकर संसाधन लगाने की बात कर चुका है।
इसके बावजूद नियमों को ताक पर रखकर अस्पताल के बिजली सप्लाई के मेन पैनल जहां पर शॉर्ट सर्किट से आग लगने की सबसे ज्यादा संभावनाएं होती हैं वहां पर अग्निशमन यंत्र ही नहीं लगाए गए हैं। यहीं नहीं अस्पताल के ओपीडी, इमरजेंसी, जनरल वार्ड और जेनरेटर कक्ष के बाहर बिजली सप्लाई के मेन पैनल बनाए गए हैं, लेकिन किसी भी पैनल के पास अग्निशमन यंत्र नहीं लगाए गए हैं। यदि शॉर्ट सर्किट से आग लगी तो बड़ा हादसे होने से नहीं रोका जा सकता है। जबकि आएदिन अस्पताल में शॉर्ट सर्किट की शिकायतें आती रहती हैं। इस बाबत अस्पताल अधीक्षक डॉ. बृजकुमार का कहना है कि अस्पताल में आग से बचाव के लिए जो संसाधन चाहिए, उसका प्रस्ताव बनाकर भेजा जा चुका है। बजट स्वीकृत होने के बाद भी इस पर कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
अग्निशमन विभाग जारी कर चुका है पत्र
विभाग के सीएफओ सुभाष कुमार ने बताया कि कुछ दिन पूर्व उन्होंने जिला और महिला अस्पताल में जागरूकता कार्यक्रम के दौरान अस्पताल प्रशासन को आग से बचाव के लिए नोटिस जारी किया गया। इसमें नियमानुसार हर 15 मीटर पर एक अग्निशमन यंत्र, फायर फाइटिंग सिस्टम, अलार्म सिस्टम, हाइट्रेंड के साथ रेत से भरी बाल्टी की व्यवस्था करने का आदेश दिया। सीएफओ ने बताया कि पूर्व में अग्निशमन विभाग की ओर कई बार अस्पताल प्रबंधन को पत्र लिखकर संसाधन लगाने के लिए अवगत कराया जा चुका है।