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बच्चों की सुरक्षा को लेकर न स्कूल प्रबंधन जागरूक, न ही प्रशासन

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मऊ। जिले में इन दिनों आरटीओ की ओर से जगह जगह चेकिंग प्वाइंट बनाकर वाहनों की चेकिंग की जा रही है। वहीं जिले में संचालित निजी स्कूलों की 292 बसें सड़कों पर बच्चों को लेकर फर्राटा भर रही है। इसमें जहां अधिकांश फिटनेस में फेल बसे है, जबकि दूसरी ओर इनमें बच्चों की सुरक्षा को लेकर न तो फस्ट एड की व्यवस्था है। न ही स्पीड गवर्नर और फायर इक्युपमेंट की।वहीं इसके बारे में सबकुछ जानते हुए आटीओ की ओर से कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है। जबकि इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट को स्पष्ट गाइड लाइन है कि विभाग द्ववारा समय समय पर स्कूल बसों को फिटनेस चेक करने के साथ ओवर स्पीड पर कार्रवाई करते रहे। जिससे हादसों को रोका जा सकें।
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जिले में विभिन्न विद्यालयों के नाम पर कुल 292 बस एआरटीओ कार्यालय से पंजीकृत है। लेकिन किसी विद्यालय के वाहन में सुप्रीम कोर्ट की ओर से जारी की गई गाइड लाइन का पालन नहीं किया जाता है। स्कूली बसों के हादसों का ग्राफ बढ़ते देख सुप्रीम कोर्ट ने विद्यालय बस के संचालन के लिए 14 बिंदुओं का पालन कराने का आदेश जारी किया था। शुरू-शुरू में तो आदेश का पालन किया गया। लेकिन बाद में समय के साथ आदेश का पालन कराना अधिकारी भुल गए। आज हालत यह है कि स्कूल वाहन में पंजीकृत किसी भी वाहन में हादसों को रोकने के लिए बसों में स्पीड गवर्नर, फायर इक्युपमेंट के साथ फस्ट एड बाक्स के साथ न तो चालक और नाही विद्यालय का नंबर नहीं अंकित किया गया है। लेकिन शहर में दो दर्जन नामी गिरामी निजी स्कूलों के अलावा जिले में संचालित अन्य स्कूलों के संचालक अभिभावकों से उनके नौनिहालों को समय से घर पहुंचाने की सुविधा के नाम पर मोटी रकम तो वसूल करते हैं, लेकिन नौनिहलों की सुरक्षा की गारंटी भी नहीं लेते। इसका परिणाम है कि कंडम होने के बाद भी छात्रों इन्ही बसों के जरिए विद्यालय आते जाते हैं। वहीं सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद स्कूल बसों में सुरक्षा के लिहाज से न तो स्पीड गवर्नर लगे है, न ही फायर इक्युपमेंट। वहीं हादसों को ध्यान में रखते हुए प्राथमिक उपचार के उदेश्य से रखा जाना वाला फस्ट एड किट भी बसों से नदारद हैै। इसके अलावा कई स्कूलों संचालकों की ओर से ऑटो, मिनी आपे से बच्चों को ले जाने के लिए रखा है। लेकिन इनमें भी क्षमता से ज्यादा बच्चों को बैठाया जा रहा है। उधर आरटीओ विभाग की माने तो उनके ओर से समय समय पर कार्रवाई कर स्कूल बसों की फिटनेस चेक की जाती है। इस संबंध में एआरटीओ कहकशा खातून ने बताया कि पिछले एक साल में विभाग द्ववारा 72 स्कूली बसों पर चालान की कार्रवाई की गई है। इनमें 22 बसों को फिटनेस फेल होने, जबकि अन्य को क्षमता से ज्यादा छात्रों को बैठाने पर चालान किया गया।
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