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तहसीलदार घोसी ने गोंड जाति के प्रमाण पत्र को निरस्त करने की भेजी रिपोर्ट

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मधुबन। गोंड़ जाति को अनुसूचित जन जाति में शामिल करने और जाति प्रमाण पत्र बनाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। तहसीलदार मधुबन द्वारा एक तरफ गोंड़ जाति के लोगों का जाति प्रमाण पत्र बनाने और जारी करने से मना कर दिया। वहीं तहसीलदार घोसी ने जनवरी 2017 से बने अब तक के सभी गोंड़ जातियों के प्रमाण पत्र को गलत बताते हुए जिलाधिकारी को पत्र भेजकर निरस्त करने की मांग की है।
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तहसीलदार हरिश्चंद्र त्रिपाठी का कहना है कि जिस गोंड़ को अनुसूचित जाति में शामिल किया गया है वह केवल झांसी मंडल और सोनभद्र क्षेत्र में पाए जाते हैं। यहां जो गोंड़ जाति है उसे पिछड़ी जाति का दर्जा प्राप्त है। जबकि इसके पहले ग्राम पंचायत से लेकर अन्य सरकारी नौकरियों में भी आवेदन करने के लिए बड़े पैमाने पर इधर के गोंड़ जाति के लोगों का अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र जारी किया गया है। यही हाल घोसी तहसील का है। यहां भी धड़ल्ले से मोटी रकम लेकर गोंड़ जाति के लोगों का अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र जारी किया गया है। जिसमें 58 प्रमाणपत्र सूर्यभान गिरी और 42 प्रमाणपत्र नायब तहसीलदार /प्रभारी तहसीलदार सर्वेश कुमार सिंह ने जारी किया है। घोसी तहसील के वर्तमान तहसीलदार श्रीप्रकाश गुप्ता ने 23 अगस्त 2017 को जिला समाज कल्याण अधिकारी तथा सदस्य सचिव जनपदीय जाति प्रमाण पत्र सत्यापन समिति को भेजे गए अपनी रिपोर्ट में उच्च न्यायालय के कई आदेशों का हवाला भी दिया है।
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