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Mau News: सड़कों में चल रहे 133 अनफिट स्कूली वाहन, खतरे में हैं नौनिहाल

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शिक्षा के नाम पर अभिभावकों से मोटी फीस वसूलने वाले निजी स्कूलों में 133 अनफिट वाहनों से बच्चों को ढोया जा रहा है। इन वाहनों में बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ की जा रही है। परिवहन विभाग ने ऐसे 35 स्कूल संचालकों को नोटिस भेजा है जो जर्जर वाहनों का इस्तेमाल छात्रों को ले जाने और ले आने के लिए करते हैं। नया शिक्षा सत्र के 15 दिन बीत गए, स्कूली बच्चों की सुरक्षा के प्रति न तो परिवहन विभाग और न ही स्कूल प्रशासन गंभीर है। अभिभावकों से मोटी फीस वसूलने के बाद भी स्कूल संचालक लापरवाह बने हुए हैं। अनफिट स्कूल वाहन सड़कों पर फर्राटा भर रहे हैं। विभागीय आंकड़ों पर गौर करें तो 130 अनफिट स्कूल वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं। विभाग ने 35 स्कूल संचालकों को नोटिस जारी किया है।
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जिले के 542 निजी स्कूलों में लगभग 700 वाहन पंजीकृत हैं। आए दिन हादसा होने के बाद भी ओवरलोड और अनफिट वाहनों पर लगाम नहीं लग पा रही है। अधिकारियों ने बताया कि स्कूल बसों में अग्निशमन किट, फर्स्ट एड बॉक्स सहित तमाम बिंदुओं पर ही फिटनेस प्रमाणपत्र जारी करता है। लेकिन वास्तविक हालात इससे अलग हैं। नया शिक्षा सत्र शुरू हुए 15 दिन बीत गए, लेकिन सड़कों पर अनफिट स्कूली बस फर्राटा भर रही हैं। बच्चे जान जोखिम में डालकर स्कूल जाने को विवश हैं। विभागीय लापरवाही की स्थिति यह है कि अभी तक संबंधित विभाग की तरफ से जांच पड़ताल तक नहीं की जा सकी है। विभागीय अभिलेखों में 367 स्कूल बसें तथा 333 छोटे वाहन स्टाफ को लाने के नाम पर पंजीकृत हैं। जबकि स्टाफ वाहनों पर ही बच्चों को ढोया जा रहा है।

स्कूल वाहन के लिए केवल बसें ही मान्य हैं, लेकिन टेंपो और छोटे वाहन भी ढो रहे बच्चे

स्कूल वाहन के लिए केवल बसें ही मान्य हैं, बावजूद इसके टेंपो, मैजिक वैन और तमाम छोटे-बड़े वाहन स्कूल वैन के नाम पर लगाए गए हैं। स्कूल का नाम, फोन नंबर लिखे बिना ही कई स्कूली बसें चल रही हैं। छोटे सवारी वाहनों से स्कूली बच्चों को ले जाना गैर कानूनी है। इसके बाद भी विभाग की तरफ से कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति कर इतिश्री कर दी जा रही है।
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फिटनेस के प्रमुख बिंदु



स्कूली बस में फर्स्ट एड बॉक्स होना चाहिए

इमरजेंसी गेट बसों के पीछे हो।

आग बुझाने के लिए 2-2 किलो के दो सिलिंडर जरूरी

बच्चे खिड़की से मुंह बाहर न निकाल पाए इसके लिए शीशों पर 5 से 7 ग्रिल अनिवार्य

स्कूली बसों को सिर्फ 40 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चलाया जा सकता है।

फिटनेस में प्रदूषण प्रमाण पत्र, फिटनेस प्रमाण पत्र, चालक का डीएल, ड्राइवर का पुलिस वैरीफिकेशन आदि।

कोट



छोटे सवारी वाहनों से स्कूली बच्चों को ले जाना गैर कानूनी है। ऐसे संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। 130 स्कूली वाहन अनफिट हैं। स्कूल संचालकों को नोटिस जारी की गई है। मानक पूरा न करने की स्थिति में वाहन पंजीयन रद्द कर दिया जाएगा।

सुहेल अहमद

एआरटीओ

मऊ

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जर्जर स्कूल वाहनों से हो चुके हैं हादसे

04 दिसंबर 2014- रानीपुर के खुरहट के महासो मानव रहित क्रॉसिंग पर ट्रेन से स्कूली वैन टकराने से पांच बच्चों की मौत हुई थी। जबकि कई घायल हुए थे।

10 अगस्त 2023 - नगर के बलिया मोड़ के पास प्राइवेट बस ने स्कूली छात्रों से भरी ऑटो को टक्कर मार दिया। इससे 15 स्कूली छात्र बुरी तरह से घायल हो गए। इसके बाद भी टैंपो, मैजिक से छात्रों को ढोया जा रहा है।

08 दिसंबर 2023- रामपुर थाना क्षेत्र के फतेहपुर मंडाव ग्राम पंचायत के मंडाव के पास स्कूली छात्रों से भरी बस मोड़ पर बेकाबू होकर सड़क किनारे 20 फीट गहरी खाई पलट गई थी। बस में सवार 26 छात्र घायल हो गए थे। बस की खिड़की तोड़कर बच्चों को बाहर निकाला गया।
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