मऊ। आर्यसमाज की ओर से आयोजित वेद प्रचार सप्ताह का गुरुवार को पांचवा दिन रहा। यज्ञ के पांचवे दिन विजय शर्मा एवं उनकी धर्मपत्नी कंचन शर्मा यजमान के तौर पर मौजूद रहे।
हवन उपरांत यज्ञब्रह्मा आचार्य विश्वव्रत शास्त्री ने कहा कि भारत वर्ष में सैंतीस हजार धर्मगुरु रजिस्टर्ड हैं, लेकिन वेद प्रचार केवल आर्य समाज ही करता आ रहा है। जबकि महर्षि स्वामी दयानंद सरस्वती कृत वेदभाष्य विदेशों तक में पढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वेद ज्ञान नित्य है और समस्त धर्मों का मूल वेद है। वेद सब सत्य विधाओं की पुस्तक है। इसलिए वेदों का पढ़ना, पढ़ाना, सुनना, सुनाना सभी आर्यों का परम धर्म है। वेद ज्ञान सार्वभौमिक, सर्वकालिक एवं सार्वदेशिक है। वैदिक संस्कृति सुगम एवं वैदिक भाषा वैज्ञानिक भाषा है। इस मौके पर दिनेशनंदन राय, प्रह्लाद वर्मा, श्रीप्रकाश राय, सर्वेश राय, पं.हरिशंकर मिश्र, सत्यप्रकाश आर्य, सुरेंद्र आर्य, दयानंद विद्यालय के प्रबंधक अशोक कुमार आर्य और प्रधानाचार्य मुरलीधर सहित स्कूली छात्र मौजूद रहे।