पिपरीडीह बाजार में दहन के लिए एकत्रित की जा रही होलिका।
रंगों का पर्व होली पर्व में छह दिन ही शेष हैं, लेकिन तैयारियां जोरों पर पर चल रही है। होलिकाएं एकत्र की जाने लगी हैं। जिले में 1246 स्थानों पर 12 मार्च को बुराई की प्रतीक होलिका को आग के हवाले किया जाएगा। संवेदनशील शहर सहित सभी होलिकाओं की सुरक्षा के लिए पुलिस प्रशासन की ओर से सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। अति संवेदनशील स्थानों को चिह्नित कर वहां पर्याप्त सुरक्षा बलों की ड्यूटी लगाई जाएगी।
रंगों का पर्व फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। पहले दिन को होलिका जलाई जाती है, जिसे होलिका दहन भी कहा जाता है। दूसरे दिन, जिसे धुरड्डी, धुलेंडी, धुरखेल या धूलिवंदन कहा जाता है, लोग एक दूसरे पर रंग, अबीर-गुलाल इत्यादि फेंकते हैं, ढोल बजा कर होली के गीत गाए जाते हैं और घर-घर जा कर लोगों को रंग लगाया जाता है।
ऐसा माना जाता है कि होली के दिन लोग पुरानी कटुता को भूल कर गले मिलते हैं और फिर से दोस्त बन जाते हैं। एक दूसरे को रंगने और गाने-बजाने का दौर दोपहर तक चलता है। इसके बाद स्नान कर के विश्राम करने के बाद नए कपड़े पहन कर शाम को लोग एक दूसरे के घर मिलने जाते हैं, गले मिलते हैं और मिठाइयां खिलाते हैं।
उत्साही युवा होलिकाएं एकत्र करने में जुट गए हैं। इस वर्ष शहर कोतवाली क्षेत्र के दक्षिण टोला, रजनिया मुंशीपुरा, दानकबीर, सब्जी मंडी औरंगाबाद, मिर्जाहादीपुरा सहित जिले में 1246 स्थानों पर होलिका दहन होगा। अपर पुलिस अधीक्षक रविंद्र कुमार सिंह का कहना है कि होली पर्व को सकुशल संपन्न कराने के व्यापक इंतजाम किए गए हैं।