रतनपुरा। स्थानीय बाजार स्थित काली स्थान के प्रांगण में चल रहे रामचरितमानस में गुरुवार को अयोध्या से पधारे संत रामदयाल बापू ने कहा कि सत्संग व्यक्ति के व्यक्तित्व के विकास में काफी अहम होता है। रामचरितमानस में गोस्वामी तुलसीदास ने भी कहा है सत्संग से ही विवेक मिलता है। यह सत्संग व्यक्ति को तभी प्राप्त होता है, जब उस पर प्रभु की कृपा होती है। सत्संग हमारे जीवन को पूर्णता प्रदान करता है। वह हमें अंधकार से प्रकाश की तरफ ले जाता है इसलिए सत्संग में भाग लेना हर व्यक्ति के लिए आवश्यक है। क्योंकि बिना सत्संग के व्यक्ति पूर्णता को प्राप्त नहीं कर पाता। उन्होंने राम चरित्र मानस को मर्यादा का महासागर बताते हुए कहा कि रामचरित मानस का हर पात्र त्याग और मर्यादा की प्रतिमूर्ति है। हमें उनसे सीख लेनी चाहिए और उसे अपने जीवन में उतार कर अपने जीवन को धन्य बनाना चाहिए।